Rajpal Yadav Check Bounce Case: बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन एक्टर Rajpal Yadav पिछले दिनों Check Bounce Case के आरोपों के तहत तिहाड़ जेल में बंद थे. हालांकि, अभी उनको बेल मिल गई है, जिसके बाद राजपाल यादव ने बाहर आकर सभी लोगों को धन्यवाद दिया. बाहर आने के बाद उन्होंने जेल की सबसे बड़ी दिक्कत के बारे में बताया, जो सिगरेट पीने से जुड़ी है.
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बाहर आकर Rajpal क्या कहा?
तिहाड़ जेल से छूटते ही सबसे पहले राजपाल यादव अपने पैतृक गांव पहुंचे. वहां पर मीडिया से बातचीत के दौरान जेल के अंदर की कई बातें बताई. लेकिन इसी बीच उन्होंने स्मोकिंग से जुड़ी इस बड़ी दिक्कत को बताया, जिसको राजपाल अपनी आंखों से देखकर आए थे. राजपाल ने स्पष्ट किया कि वे सिगरेट या तंबाकू का प्रचार नहीं कर रहे हैं. फिर भी उन्होंने एक बड़ी मांग की- जेलों में अलग से स्मोकिंग जोन या स्मोकिंग रूम होना चाहिए.
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स्मोकिंग रूम की क्यों मांग की?
Rajpal Yadav ने बताया कि रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर सिगरेट पीने के लिए खास जगह होती है. उसी तरह जेल में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए. उनका कहना है कि इससे अन्य कैदियों को परेशानी नहीं होगी और स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. वे बोले, "जब बाहर तंबाकू बिकता है और उससे अच्छा कारोबार चलता है, तो जेल में भी कैदियों के लिए यह सुविधा होनी चाहिए."
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कैदियों को लेकर भी बोले राजपाल
राजपाल ने सिर्फ स्मोकिंग से जुड़ी इस समस्या के बारे में नहीं बताया, बल्कि कैदियों से जुड़ी इस विशेष समस्या को भी बाहर लाए. मीडिया से बात करते हुए राजपाल यादव ने बोला- 'जेल सिर्फ सजा देने की जगह नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र होना चाहिए. जहां कैदी अपनी जिंदगी बदल सकें.'
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Smoking को लेकर जेल के अंदर नियम
Jail में रहने के अलग नियम होते हैं. अगर स्मोकिंग से जुड़े नियमों पर बात करें तो ज्यादातर जेलों और संघीय कारागार ब्यूरो (BOP) ने मिलकर कैदियों के लिए तंबाकू पर पूरी तरह रोक लगा दी है. सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू और ई-सिगरेट (Vapes) जैसी सभी चीजों पर पाबंदी है. यह अब लगभग हर जगह का सामान्य नियम बन चुका है. हालांकि कुछ छोटी (काउंटी) जेलें अब भी ऐसी हैं जहाँ यह नियम पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन ऐसी जगहें बहुत कम हैं.
क्या कहते हैं लोग?
राजपाल का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है. कुछ लोग इसे अजीब मानते हैं, जबकि कुछ कैदियों की परेशानी समझते हैं. राजपाल ने कहा कि जेल को आधुनिक समय के हिसाब से अपग्रेड करना चाहिए. वे चाहते हैं कि कैदियों को सुधार का मौका मिले, न कि सिर्फ सजा.
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