Mandala Murders Review: अपने ही बनाए जाल में उलझी सीरीज, कैरेक्टर्स ने करवाई छीछा-लेदर

Mandala Murders Review: ‘मंडला मर्डर्स’ नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो गई है। इस सीरीज में कई कमियां है, जो आपका मजा किरकरा कर सकती है। कहीं एक्टर्स चूक गए, तो कहीं राइटर और डायरेक्टर।

Mandala Murders

'मंडला मर्डर्स' देखने से पहले पढ़ें रिव्यू। (Photo Credit- YouTube)

Movie name: Mandala Murders

Director: Gopi Puthran

Movie Casts: Vaani Kapoor, Surveen Chawla, Shriya Pilgaonkar,

★★★★★

Mandala Murders Review: (By- Ashwani Kumar) ‘मंडला मर्डर्स’… यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी पहली माइथोलॉजिकल- साइकोलॉजिकल- मिस्टिकल- क्राइम मर्डर मिस्ट्री, जो नेटफ्ल्किस पर स्ट्रीम हो रही है। ‘मंडला मर्ड्स’ के इस लंबे चौड़े जॉनर को सुनकर ही आपको लगने लगेगा कि 8 एपिसोड की ये सीरीज इतना कुछ बनने की कोशिश कर रही है कि कुछ भी नहीं हो पाती। यशराज फिल्म्स के बैनर तले रानी मुखर्जी को ‘मर्दानी’ बनाने की कहानी लिखने वाले और फिर ‘मर्दानी 2’ को लिखने और डायरेक्ट करने के बाद, डायरेक्टर गोपी पूर्थन ने ‘मंडला मर्डर्स’ के लिए कहानी की दुनिया तो अच्छी सजाई, मगर अपने किरदारों को पॉजिटिव और निगेटिव दोनों ही पैमाने पर बैलेंस करने के चक्कर में, कहानी पर अपना बैलेंस खो बैठे।

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वरुणा के जंगलों में छिपा है राज

नॉर्थ इंडिया का एक शहर- चरणदासपुर और उसके करीब वरुणा के जंगलों में छिपा एक राज, जहां अपना भगवान बनाने के लिए जुटी कुछ औरतें, जो इस दुनिया में आएगा और पूरे का पूरा वर्ल्ड ऑर्डर बदल देगा। वरुण के जंगलों में इस खुफिया जगह, जहां की यूनीवर्स की एनर्जी से कुछ चुने हुए लोगों को मोल चुकाकर वरदान मिलता है, वो आयस्त कहलाता है। इस आयस्त में एक अलग भगवान को मानने वाली औरतें- आयस्ती कहलाती हैं और आयस्ती अलग-अलग वरदान प्राप्त लोगों के शरीर के हिस्सों को जोड़कर, एक खास मैग्नेटिक मशीन से उसमें जान फूंककर, उस नए भगवान- यस्त को बनाना चाहती हैं।

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बलिदान के नाम पर दिखा खूनी खेल

1952 से 2022 तक के टाइम लाइन की इस कहानी में पीढ़ियों तक ये राज छिपा है और दिल्ली से लेकर चरणदासपुर तक- बलिदान के नाम पर खूनी खेल, खेला जा रहा है। इस केस में दिल्ली पुलिस से सस्पेंशन झेल रहे इंस्पेक्टर विक्रम सिंह चरणदासपुर आते हैं और सालों पहले गुम हुई अपनी मां को तलाशते हैं। दूसरी ओर CIB में अपनी पहचान को साबित करने के लिए ऑफिसर रिया थॉमस पहुंचती हैं और इन्वेस्टीगेशन में इन सारे किरदारों की हिस्ट्री, वहां की लोकल पॉलिटिशन अनन्या भारद्वाज के साथ इस गहरे राज से जुड़ती चली जाती है।

हर किरदार की है बैक स्टोरी

यशराज ने 8 एपिसोड की इस सीरीज को बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। YRF टैलेंट की टीम से- वाणी कपूर को इस सीरीज को लीड करने भेज दिया और साथ ‘गुल्लक’ वाले सीनियर और जुनियर मिश्रा जी यानी जमील खान और वैभव राज गुप्ता के साथ, सुरवीन चावला, रघुबीर यादव, श्रिया पिलगांवकर जैसे एक्टर्स की टीम खड़ी कर दी। सोचिए जरा ओटीटी में जिन एक्टर्स को लीड लेकर ‘आश्रम’ और SHE जैसी सीरीज बन चुकी हो, वो अदिति पोहनकर इस सीरीज में एक गेस्ट कैरेक्टर हैं। संदीप भैया यानी सनी हिंदुजा का भी इस सीरीज में एक कैमियो है। ‘मंडला मडर्स’ में हर कैरेक्टर की बैक स्टोरी है, उसके अपने राज हैं। इस लिहाज से 8 एपिसोड में कहानी भागती तो बहुत तेजी से है, कि एक तार छूटा, तो आपको पलटकर उसे समझना होगा।

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शुरू से खटकेगी फिक्शनल दुनिया

कहानी के लिए जो पूरी फिक्शनल दुनिया बनाई गई है, वो शुरु से खटकने लगती है। आपको साफ पता है कि चरणदासपुर, दरअसल वाराणसी है। मगर मेकर्स ने कहानी फिक्शनल मान्यताओं, नकली भगवान, काले जादू के इर्द-गिर्द बुनी है। ऐसे में वो वाराणसी यानी बनारस नाम इस्तेमाल करने से बचने की पूरी कोशिश करते रहे हैं। बनारसी बोलने के चक्कर में इसके कैरेक्टर्स ने जो छीछा-लेदर मचाई है, वो पूछिए नहीं, कानों में चुभता है वो। राइटर और डायरेक्टर समझ ही नहीं पाए हैं कि उन्हें आयस्तियों को हीरो बनाना है या विलेन… नतीजा आप भी पूरी सीरीज में कंफ्यूज रहते हैं कि किस कैरेक्टर को आपको किस चश्मे से देखना है।

सीरीज में कैसा लगा कौन-सा किरदार?

श्रिया पिलगांवकर को रुक्मिणी और महामनी बनाने के चक्कर में जो कॉस्ट्यूम पहनाया गया है, वो जरूरत से ज्यादा खटकता है। क्लाइमेक्स में जो कहानी दोहराई गई है, वो इस सीरीज के मोमेंटम को बड़ा झटका है। बाकि विजुअल इफेक्ट्स, बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमैटोग्राफी, लोकेशन हर डिपार्टमेंट में ये सीरीज दमदार है, लेकिन CBI को इस सीरीज में इतनी बार CIB बोल दिया गया है कि अच्छे भले परफॉर्म करते एक्टर्स भी कुछ अजीब से ही लगने लगते हैं। रिया थॉमस के कैरेक्टर में वाणी कपूर ने अपनी अच्छी परफॉरमेंस दी है, इमोशनल और एक्शन सीन्स दोनों में वो अच्छी लग रही हैं। वैभव राज गुप्ता का काम वाकई शानदार है। सुरवीन चावला के कैरेक्टर के लेयर्स भी अच्छे हैं और परफॉरमेंस में तो वो बेहतरीन है हीं।

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सीरीज में क्या है खामियां?

श्रिया पिलगांवकर के पास करने को कुछ खास नहीं है, वो महामनी बनकर भी कोई जादू नहीं दिखा पाई हैं। राइटर और डायरेक्टर ने उन्हें इसका मौका भी नहीं दिया। जमील खान और रघुबीर यादव ने इस शो के स्केल और इंटेसिटी दोनों को बढ़ाया है। अदिति और सनी हिंदुजा के कैमियो को वेस्ट किया गया है। ‘मंडला मर्डर्स’ की दुनिया में थ्रिल-मिस्ट्री और साइकॉलॉजी तो है, लेकिन माइथॉलॉजी के गेम में ये सीरीज अपने ही बनाए जाल में उलझ गई है। खामियों के बाद भी ये सीरीज दिलचस्प है।

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मंडला मर्डर्स को 3 स्टार

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लेख समाप्त
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