C. Ramchandra: ना सिर्फ हिंदी सिनेमा बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री के भी कई नाम ऐसे हैं, जिनकी आज भी चर्चा होती है. आज हम आपको म्यूजिक इंडस्ट्री के एक ऐसे ही नाम के बारे में बता रहे हैं, जिनकी धुनें आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं. अब आपके मन में भी ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर यहां हम किसकी बात कर रहे हैं? तो आइए जानते हैं इनके बारे में…
लता मंगेशकर मानती थीं गुरू
दरअसल, हम जिनकी बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं बल्कि सी. रामचंद्र हैं. सी. रामचंद्र को स्वर कोकिला लता मंगेशकर अपना गुरू मानती थीं. लता मंगेशकर और रामचंद्र को लेकर ऐसा कहा जाता है कि लता मंगेशकर रात-रातभर रामचंद्र के पास बैठकर हर गाने की डिटेल सुनती थीं.
संगीत की शिक्षा भी हासिल की
सी. रामचंद्र की बात करें तो उनका जन्म 12 जनवरी 1918 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के बुदवा गांव में हुआ था. उनके असली नाम की बात करें तो उनका असली नाम रामचंद्र नरहर चितलकर था. रामचंद्र को बचपन से ही संगीत में बहुत दिलचस्पी थी और उन्होंने संगीत की शिक्षा भी हासिल की.
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा
सी. रामचंद्र ने शुरुआत में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था. रामचंद्र ने यूबी राव की फिल्म ‘नागानंद’ में लीड किरदार निभाया था, लेकिन उनकी फिल्मों को ज्यादा सफलता नहीं मिली थी. रामचंद्र को जब लगा कि एक्टिंग में उनका करियर सफल नहीं हो रहा है, तो उन्होंने संगीत की ओर रुख किया.
50 के दशक में चमका करियर
सी. रामचंद्र ने जैसे ही संगीत की दुनिया में कदम रखा, तो उनकी किस्मत ही पलट गई और उन्हें पहला बड़ा मुकाम तमिल फिल्मों से मिला. इसके बाद उन्हें साल 1942 में हिंदी फिल्मों में भी सफलता मिली. 50 के दशक में उनका करियर पूरी तरह चमक उठा था. रामचंद्र के करियर में लगभग 150 फिल्मों में संगीत शामिल था.
अपनी एक अलग पहचान बनाई
उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, तमिल, तेलुगु और भोजपुरी फिल्मों में भी संगीत दिया है और अपनी एक अलग पहचान बनाई है. उनके सबसे मशहूर गीतों में देशभक्ति का गाना ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ शामिल है, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखें भी नम हो गई थीं.
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