RE-NEET UG 2026 की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का सबसे बड़ा लक्ष्य अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट हासिल करना होता है. इस सीट के लिए छात्र महीनों तैयारी करते हैं और अपने खेल आदि से समझौता करते हैं, ताकि वह अपना और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बना सके. लेकिन हर साल छात्रों के मन में एक सवाल जरूर रहता है कि आखिर कितने मार्क्स पर सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल सकता है? दरअसल इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि प्रवेश सिर्फ अंकों पर नहीं बल्कि आपकी कैटेगरी, राज्य, काउंसलिंग कोटा, सीटों की उपलब्धता और उस साल की कटऑफ पर भी निर्भर करता है. यही वजह है कि एक ही स्कोर पर अलग-अलग छात्रों को अलग कॉलेज मिल सकते हैं. ऐसे में सिर्फ कटऑफ देखने के बजाय सुरक्षित स्कोर का लक्ष्य तय करना ज्यादा समझदारी माना जाता है, ताकि आपका एडमिशन सही कॉलेज में हो सके.
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किस स्कोर पर बढ़ जाते हैं सरकारी कॉलेज के चांस?
सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की संभावना बढ़ाने के लिए छात्रों को नीचे दिए गए स्कोर रेंज पर ध्यान देना चाहिए:
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- 700+ 720 मार्क्स: AIIMS, शीर्ष केंद्रीय संस्थान और देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की ज्यादा संभावना.
- 650-700 मार्क्स: अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज और मशहूर राज्य संस्थानों में सीट मिलने की बेहतर उम्मीद.
- 600-650 मार्क्स: कई राज्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के अवसर बन सकते हैं.
- 550-600 मार्क्स: कुछ राज्यों और आरक्षित श्रेणियों में सरकारी कॉलेज की संभावना बनी रह सकती है.
- 500-550 मार्क्स: सामान्य वर्ग के लिए यहां राह मुश्किल होती है, लेकिन अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को इस रेंज में अच्छे सरकारी संस्थान मिल जाते हैं.
हर साल क्यों बदल जाती है NEET की कटऑफ?
कई छात्र पिछली कटऑफ देखकर अपना लक्ष्य तय कर लेते हैं, जबकि हकीकत यह है कि कटऑफ हर साल बदल सकती है. इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं:
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- परीक्षा का कठिन या आसान होना.
- परीक्षा में बैठे छात्रों की कुल संख्या.
- टॉप स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या.
- MBBS सीटों में संख्या.
- राज्य और अखिल भारतीय कोटा की स्थिति.
- काउंसलिंग प्रक्रिया और कॉलेज की मांग.
इसलिए जरूरी है कि आप ज्यादा से ज्यादा अंक के लिए मेहनत करें, ताकि बड़े लक्ष्य के साथ आप सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिले.
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कैटेगरी के अनुसार कितना स्कोर माना जा सकता है सुरक्षित?
पिछले साल के रुझानों को देखें तो सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 650 या उससे ज्यादा अंक सुरक्षित माने जाते हैं. वहीं OBC वर्ग के लिए 600 से 630 अंक काफी कॉम्पिटेटिव स्कोर हो सकते हैं. वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के लिए 520 से 570 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 500 से 550 अंक कई परिस्थितियों में लाभदायक साबित हो सकते हैं. हालांकि कटऑफ परिणाम और काउंसलिंग के बाद ही चीजें स्पष्ट होती है.
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AIQ और State Quota को समझना भी है जरूरी
NEET के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए सिर्फ अच्छे अंक ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग प्रक्रिया की सही जानकारी भी जरूरी है. अखिल भारतीय कोटा (AIQ) में पूरे देश के छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं, इसलिए यहां कटऑफ ज्यादा रहती है. वहीं राज्य कोटा में संबंधित राज्य के छात्रों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे कई बार कम अंकों पर भी बेहतर कॉलेज मिलने की संभावना बन जाती है. इसलिए छात्रों को अपने राज्य के नियम, पात्रता और काउंसलिंग प्रक्रिया को पहले से समझ लेना चाहिए.
काउंसलिंग में छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
परीक्षा पास करना सिर्फ आधी जंग जीतने जैसा है; असली जीत सही काउंसलिंग रणनीति से मिलती है. कई बार बेहतरीन मार्कस लाने के बावजूद छात्र सिर्फ चॉइस फिलिंग की गलती या डॉक्यूमेंट्स की कमी के कारण एक अच्छे सरकारी कॉलेज से हाथ धो बैठते हैं. इसलिए ऑल इंडिया और स्टेट दोनों काउंसलिंग पर बारीक नजर रखें. अपने पास अपना नीट स्कोरकार्ड, एडमिट कार्ड, वैलिड कैटेगरी सर्टिफिकेट, डोमिसाइल (मूल निवास) प्रमाण पत्र और एक सही प्राथमिकताओं वाली कॉलेजों की लिस्ट हमेशा तैयार रखें, ताकि अंतिम समय में किसी भी तरह की आपाधापी से बचा जा सके और आपकी मेहनत रंग ला सके.
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