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शिक्षा

किसान के बेटे ने JEE Mains में हासिल की रैंक 1, रोजाना इतने घंटे पढ़कर बने ऑल इंडिया टॉपर

जेईई मेंस 2024 के टॉपर नीलकृष्ण गजारे एक किसान के बेटे हैं। उन्होंने खराब आर्थिक स्ठिति के साथ कई समस्याओं का सामना करते हुए जेईई मेंस में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की थी। वह इस परीक्षा के लिए रोजाना 10 घंटे पढ़ाई करते थे।

Author Edited By : News24 हिंदी Updated: Apr 3, 2025 11:32
jee mains 2024 topper nilkrishna gajare

भारत के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में एडमिशन के लिए आयोजित ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) देश और दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, ताकि उन्हें IIT में पढ़ने का मौका मिल सके। IIT में एडमिशन के लिए छात्रों को JEE Main और JEE Advanced दोनों परीक्षाएं पास करनी होती हैं।

लेकिन आज हम बात कर रहे हैं नीलकृष्ण गजारे की, जो एक किसान के बेटे हैं और जिन्होंने JEE Main 2024 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की थी।

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छोटे से गांव से देश का टॉपर बनने तक का सफर
नीलकृष्ण गजारे महाराष्ट्र के वाशीम जिले के बेलखेड गांव से आते हैं। उनके पिता निर्मल गजारे किसान हैं और सोयाबीन की खेती करते हैं, जबकि उनकी मां योगिता गजारे गृहिणी हैं। नीलकृष्ण के माता-पिता ने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की है, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद की।

नीलकृष्ण के लिए यह सफर आसान नहीं था। उनके गांव में बिजली और अन्य सुविधाओं की कमी थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने JEE Main 2024 में 100 NTA स्कोर के साथ Paper-1 (B.E./B.Tech.) में शानदार प्रदर्शन किया और AIR 1 हासिल की।

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कड़ी मेहनत और मजबूत इरादे
नीलकृष्ण की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और अनुशासन है। वह रोजाना 10 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उनके पिता ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह अपने बेटे की सफलता से बहुत खुश हैं और इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते।

नीलकृष्ण ने करंजा लाड (Washim) के J.C. हाई स्कूल और अकोला के राजेश्वर कॉन्वेंट में पढ़ाई की। वह पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी बेहद प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने नेशनल लेवल तक तीरंदाजी (Archery) में हिस्सा लिया।

स्कॉलरशिप से मिली मदद
नीलकृष्ण शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। उन्होंने 10वीं कक्षा में 97% अंक हासिल किए। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने एक कोचिंग इंस्टीट्यूट की टैलेंट हंट परीक्षा पास की और 75% स्कॉलरशिप पाकर JEE की तैयारी शुरू की।

नीलकृष्ण का पढ़ाई का एक सख्त रूटीन था। वह सुबह 4 बजे उठते, 2 घंटे पढ़ाई करते, प्राणायाम करते, फिर 8:30 बजे से फिर से पढ़ाई शुरू करते और रात 10 बजे सो जाते।

नीलकृष्ण की छोटी बहन भी बड़ी महत्वाकांक्षाएं रखती हैं और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती हैं।

लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बनें नीलकृष्ण
नीलकृष्ण गजारे की सफलता की कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर मेहनत और दृढ़ निश्चय हो, तो कोई भी मुश्किल मंजिल हासिल की जा सकती है।

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First published on: Apr 03, 2025 11:32 AM

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