Silver Rate Today: चांदी की कीमतों ने ‘रॉकेट’ जैसी रफ्तार पकड़ ली है. आज 20 जनवरी 2026 को चांदी भारतीय बाजार (MCX) और रिटेल मार्केट में अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर बनी हुई है. 19 जनवरी को पहली बार 3 लाख रुपये का मनोवैज्ञानिक स्तर टूटने के बाद अब हर किसी की नजर 3.50 लाख रुपये के अगले बड़े लक्ष्य पर है.
आज (20 जनवरी 2026) चांदी का भाव
MCX चांदी (March Contract) पर आज चांदी का भाव 316355 प्रति किलो पर है. सुबह 11:15 बजे चांदी के भाव में 6080 का उछाल देखा गया. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में रीटेल चांदी की कीमत 315100 प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है.
क्या जनवरी में ही 3.50 लाख रुपये का आंकड़ा पार होगा?
बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्म्स (जैसे SAMCO Securities) की मानें तो यह असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी ने एक बड़े ‘ब्रेकआउट’ क्षेत्र को पार किया है. अगर यह तेजी बरकरार रहती है, तो अगला टेक्निकल टारगेट 3.56 लाख रुपये प्रति किलो का दिखाई दे रहा है.
अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ‘ट्रेड वॉर’ (Trade War) गहराता है और ट्रंप अपने टैरिफ बयानों पर अड़े रहते हैं, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी जनवरी के अंत तक या फरवरी की शुरुआत में 3.50 लाख रुपये के स्तर को छू सकती है.
क्या कीमतों में हो सकता है करेक्शन ?
क्योंकि चांदी पिछले 15 दिनों में करीब 30-40% बढ़ चुकी है, इसलिए अब 3.17 लाख रुपये के आसपास ‘प्रॉफिट बुकिंग’ आ सकती है, जिससे भाव थोड़े समय के लिए गिरकर 2.80 लाख रुपये तक आ सकते हैं.
चांदी की इस ‘सुपर रैली’ के 3 बड़े पिलर
सप्लाई की भारी कमी: चांदी का खनन (Mining) मांग के मुकाबले बहुत कम है. दुनिया लगातार पांचवें साल चांदी की कमी (Deficit) का सामना कर रही है.
इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और AI चिप्स में चांदी का कोई सस्ता विकल्प नहीं है. इन सेक्टरों की ग्रोथ चांदी को ऊपर खींच रही है.
भू-राजनीतिक तनाव: रूस, ईरान और अब अमेरिका-यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है, जिससे वे सोने-चांदी की शरण में जा रहे हैं.
क्या करें निवेशक ?
नए खरीदार: भाव अपने ‘ऑल-टाइम हाई’ पर हैं, इसलिए एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय ‘बाय ऑन डिप्स’ (Buy on Dips) यानी कीमतों में गिरावट आने पर ही खरीदारी करें.
पुराने निवेशक: अगर आपको 100% से ज्यादा मुनाफा हो रहा है, तो आंशिक रूप से (40-50%) मुनाफावसूली (Profit Booking) करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है.