ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की राह साफ होने और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के दोबारा खुलने के बाद केंद्र सरकार ने देश की जनता को एक बड़ी राहत दी है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने घोषणा की है कि देश में एलपीजी (LPG) का बैकलॉग अब घटकर मात्र 3.1 दिन रह गया है. इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की देशव्यापी आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य हो गई है और सभी रिटेल आउटलेट्स पर कामकाज सुचारू रूप से चल रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि अब देश की किसी भी गैस एजेंसी पर एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है.
क्या कम होंगी पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतें?
होर्मुज जलमार्ग के खुलने और आपूर्ति सामान्य होने के बाद अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध के दौरान बढ़ी हुई कीमतों में कटौती की जाएगी? हालांकि, मंत्रालय की ओर से मिले आंकड़े फिलहाल किसी तत्काल राहत की ओर इशारा नहीं करते. संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. वर्तमान में हर एलपीजी सिलेंडर पर 'अंडर-रिकवरी' (लागत के मुकाबले कम वसूली) आज भी 700 रुपये बनी हुई है.
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इसी तरह, तेल कंपनियों को प्रति लीटर डीजल पर 27 रुपये और प्रति लीटर पेट्रोल पर 3 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है. साफ है कि कीमतों में कई बार बढ़ोतरी के बाद भी सरकारी तेल कंपनियों का घाटा कम नहीं हुआ है.
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वैश्विक बाजारों पर निर्भर भारत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजारों पर निर्भर है. देश अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल, 50% एलएनजी (LNG) और 60% एलपीजी का आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता था. 28 फरवरी 2026 को मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण पिछले 108 दिनों के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमरा गई थी. इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने तेल कंपनियों के साथ मिलकर आयात के सोर्सेज को बदला और नए बाजारों से स्टॉक मंगवाया.
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