अगर आपने अपने पीएफ (EPF/PF) के पैसे निकालने के लिए क्लेम किया है और सब कुछ सही होने के बाद भी पैसे समय पर नहीं आ रहे हैं, तो यह खबर आपके बेहद काम की है. हाल ही में आए एक बड़े फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि बिना किसी वाजिब वजह के PF क्लेम अटकाने पर कर्मचारियों को एक्स्ट्रा ब्याज और मुआवजा मिल सकता है.
मुंबई कंज्यूमर कमीशन ने हाल ही में EPFO को एक रिटायर्ड कर्मचारी के 14.06 लाख रुपये के क्लेम में 35 दिन की देरी करने पर 6% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है. आइए समझते हैं कि 20 दिन का नियम क्या है, देरी होने पर कितना ब्याज लग सकता है और आप कहां शिकायत कर सकते हैं.
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क्या है PF क्लेम का 20 दिन वाला नियम?
सोशल सिक्योरिटी कोड के नए नियमों के तहत अगर आपका क्लेम फॉर्म पूरी तरह से सही भरा गया है और सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे कि KYC, बैंक डिटेल्स सही हैं, तो EPFO को 20 दिनों के भीतर क्लेम सेटल करना होगा. अगर कोई अधिकारी बिना किसी ठोस कारण के 20 दिन में क्लेम निपटाने में नाकाम रहता है, तो नियम के मुताबिक 12% सालाना की दर से पेनल इंटरेस्ट (दंडात्मक ब्याज) लगाया जा सकता है. खास बात यह है कि यह ब्याज संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूला जाएगा.
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मुंबई कंज्यूमर कमीशन का फैसला क्यों है खास?
मुंबई के एक मामले में रिटायर्ड कर्मचारी के 14,06,272 रुपये के PF क्लेम में 9 नवंबर से 13 दिसंबर के बीच 35 दिनों की देरी हुई थी. EPFO ने जॉइंट डिक्लेरेशन से जुड़ी समस्या की जानकारी सही समय पर कर्मचारी को नहीं दी, जिसे कंज्यूमर कमीशन ने सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना. इसके बाद आयोग ने EPFO को 35 दिन की देरी के लिए 6% सालाना की दर से ब्याज देने और 45 दिनों में आदेश का पालन करने का सख्त निर्देश दिया.
अगर आपका PF क्लेम अटक जाए तो क्या करें?
अगर 20 दिन बीत जाने के बाद भी आपका PF ट्रांसफर या विड्रॉल का पैसा नहीं आता, तो आप ये आसान कदम उठा सकते हैं:
EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत करें: EPFO के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल (epfigms.gov.in) पर जाकर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करें.
निधि आपके निकट (Nidhi Aapke Nikat): EPFO हर महीने की 27 तारीख (या घोषित तिथियों) को क्षेत्रीय कार्यालयों में शिविर लगाता है, जहां आप सीधे अपनी बात रख सकते हैं.
रीजनल कमिश्नर से संपर्क करें: अपने एरिया के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (RPFC) को लिखित में आवेदन दें.
कागजात संभाल कर रखें: क्लेम जमा करने की तारीख, रेफरेंस नंबर और EPFO से हुए किसी भी पत्राचार का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर कंज्यूमर फोरम की मदद ली जा सके.
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