वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा असर अब आपकी और हमारी जेब पर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच गहराता विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सख्त चेतावनी और ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नाकाबंदी जारी रखने की जिद ने वैश्विक कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का भाव 81.37 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 87.16 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. आइए जानते हैं कि वैश्विक मोर्चे पर क्या चल रहा है और क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सच में बढ़ने वाली हैं.
ट्रंप की धमकी और क्रूड ऑयल की चाल
फरवरी से ही अमेरिका और ईरान के बीच बने तनाव के चलते कच्चे तेल की दरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान शर्तों को स्वीकार नहीं करता है, तो उस पर अनिश्चितकाल के लिए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू रहेंगे. हालांकि, इस नई धमकी के बाद भी शुक्रवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में कोई अचानक बड़ा उछाल नहीं देखा गया, बल्कि बाजार में शुरुआती हल्की गिरावट दर्ज की गई.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता
दुनिया भर के निवेशकों की नजरें इस वक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग पर टिकी हुई हैं. यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है. अमेरिका का दावा है कि फारस की खाड़ी के इस मार्ग से वर्तमान में भी रोजाना लगभग 9 मिलियन बैरल तेल का परिवहन जारी है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है. दूसरी तरफ, ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक इस रास्ते से आपूर्ति को सामान्य नहीं होने दिया जाएगा.
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की बड़ी चेतावनी
वैश्विक निवेश बैंकिंग दिग्गज ‘गोल्डमैन सैक्स’ ने कच्चे तेल को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है. एजेंसी के अनुसार, अगर होर्मुज के रास्ते में रुकावटें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, उनका यह भी मानना है कि यदि मध्य पूर्व (Middle East) में कूटनीतिक बातचीत से तनाव कम होता है, तो साल की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड का औसत भाव $80 प्रति बैरल के आसपास स्थिर हो सकता है.
भारतीय उपभोक्ताओं और ईंधन की दरों पर इसका क्या असर होगा?
भारतीय संदर्भ में देखा जाए तो देश अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. भारत में फिलहाल तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. अगर वैश्विक स्तर पर तनाव इसी तरह बना रहा और क्रूड ऑयल 100-120 डॉलर के पार गया, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी से इंकार नहीं किया जा सकता.
मध्य पूर्व का यह संकट केवल दो देशों का विवाद नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दुनिया भर के ईंधन बाजार पर पड़ रहा है. जब तक होर्मुज से तेल की निर्बाध सप्लाई शुरू नहीं होती, तब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जोखिम बना रहेगा.
संबंधित खबरें
Jio IPO की तारीखों का ऐलान, 21 से 23 अक्टूबर तक लगा सकेंगे बोली
2 hrs agoJio के IPO में रिलायंस शेयरधारकों के लिए विशेष रिजर्वेशन का प्लान
3 hrs agoJio नेटवर्क से जुड़े 52 करोड़ से ज्यादा लोग, 42GB से ज्यादा डेटा का उपभोग
4 hrs agoसऊदी अरामको पर हमला क्यों अहम? भारत के तेल आयात पर क्या होगा असर
5 hrs agoकमजोर रुपया और महंगा लोन बढ़ाएंगे विदेश में पढ़ाई का खर्च
6 hrs agoधीरूभाई अंबानी की विरासत ने निवेशकों को दिया 1600 गुना रिटर्न
7 hrs agoJIO ला रहा है अपना IPO, कभी धीरुभाई ने हर आम भारतीय को बनाया था पार्टनर
8 hrs agoHDFC लोन और शॉपिंग पर 70000 रुपये बचाने का दे रहा है मौका, जानें पूरा ऑफर
10 hrs agoमहाराष्ट्र में बड़ा ऐलान, दिवाली से पहले हर किसान को 5000 रुपये देगी सरकार
10 hrs agoगौतम अदाणी और माइकल ब्लूमबर्ग की बड़ी मुलाकात, क्लीन एनर्जी को कही ये बात
11 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines