भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग देशों से आयात करता है, लेकिन तेल निर्यात में भी हम सऊदी और यूएई को पीछे छोड़ देंगे, ये जरूर चौंकाने वाली रिपोर्ट है. अगर आप भी इस बात से हैरान हैं तो आपको बता दें कि भारत अपनी पड़ोसी देश बांग्लादेश समेत कई देशों को तेल निर्यात भी करता है. यूक्रेन द्वारा रूस के ऑयल प्लांट्स पर हमले के बाद भारत ने रूस को भी ईंधन सप्लाई की थी, जबकि रूस खुद दुनिया को तेल निर्यात करता है. अब भारत ने बड़ा कीर्तिमान हासिल करते हुए केन्या को तेल सप्लाई करने के मामले में सऊदी और यूएई को भी पीछे छोड़ दिया है.
भारत ने कैसे किया ये कमाल?
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका संघर्ष के चलते कई महीनों से होर्मुज से निर्यात व्यवस्था बाधित हुई है, जिसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ा है. इस संकट की घड़ी में भारत कई देशों के लिए मददगार साबित हुआ है. भारत अब केन्या के लिए पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है. खास बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के कारण तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है.
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भारत ने कैसे बदला तेल सप्लाई का खेल?
बेल्जियम की कमोडिटी डेटा कंपनी कप्लर के आंकड़ों का हवाला देते हुए अमेरिका के डलास स्थित ऊर्जा अर्थशास्त्री अनस अल्हाजजी ने बताया कि भारत ने केन्या को गैसोलीन, डीजल, जेट फ्यूल और फ्यूल ऑयल की आपूर्ति में UAE और सऊदी अरब की जगह ले ली है. केन्या लंबे समय से अपने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की जरूरत के लिए सऊदी अरामको, अबू धाबी की ADNOC जैसी कंपनियों पर निर्भर रहा है. हालांकि, मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण सप्लाई और ट्रेडिंग रूट प्रभावित होने के बाद केन्या के लिए वैकल्पिक सोर्स के तौर पर भारत बड़ा ऑप्शन बनकर सामने आया है.
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अफ्रीका बना भारतीय ईंधन का बड़ा बाजार
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत से अफ्रीका को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात जुलाई 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. अनस अल्हाजजी के मुताबिक, इस दौरान अफ्रीका को भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात सालाना आधार पर 66 फीसदी बढ़ा.
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