पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार के बीच भारत सरकार ने देश को तेल संकट से बचाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रित (Ethanol-Blended) पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह से माफ करने का ऐलान किया है। बुधवार को जारी एक सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कंज्यूमर और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री दोनों पर असर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जारी है और होर्मुज स्ट्रेट बाधित है। ऐसे में दुनिया हाल के दशकों में सबसे बुरे एनर्जी झटकों में से एक का सामना कर रही है। कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 126 डॉलर हो गई हैं। सरकार के इस मास्टरस्ट्रोक से न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा बल्कि विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता भी काफी हद तक कम होगी।
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नए नियमों में क्या है? कितने प्रतिशत ब्लेंडिंग पर मिलेगी छूट?
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, टैक्स छूट का यह गणित वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिस पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत (E22 से E30) तक एथेनॉल मिक्स होगा, उसे एक्साइज ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त (Exempt) रखा जाएगा। इस टैक्स छूट का मुख्य उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सप्लायर्स को अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले ईंधन को बाजार में उतारने के लिए आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करना है।
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आम रिटेल आउटलेट्स पर बिकने वाले सामान्य पेट्रोल पर तत्काल कोई टैक्स बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नए नियमों से भविष्य में हाई-एथेनॉल फ्यूल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार होगा।
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पश्चिम एशिया युद्ध (West Asia War) के बीच क्यों जरूरी था यह कदम?
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता होने के नाते, भारत वैश्विक परिस्थितियों के प्रति काफी संवेदनशील है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $70 प्रति बैरल से उछलकर करीब $126 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। जहां दुनिया के कई विकसित देश (जैसे यूरोपीय देश) इस संकट के कारण ₹200 से ₹290 प्रति लीटर तक पेट्रोल बेचने को मजबूर हैं, वहीं भारत ने टैक्स एडजस्टमेंट और रणनीतिक सूझबूझ से घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा हुआ है। गन्ने और अनाज से तैयार होने वाला एथेनॉल पूरी तरह स्वदेशी है. इसके बढ़ते उपयोग से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और देश का आयात बिल (Import Bill) कम होगा.
किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए विन-विन सिचुएशन
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम केवल एक ऊर्जा नीति नहीं, बल्कि एक आर्थिक और सामाजिक सुधार भी है। एथेनॉल बनाने के लिए कच्चे माल (जैसे गन्ना, मक्का और खराब अनाज) की जरूरत होती है। मांग बढ़ने से देश के करोड़ों अन्नदाताओं को उनकी फसलों का बेहतर और सुनिश्चित दाम मिल सकेगा। पारंपरिक फॉसिल फ्यूल की तुलना में एथेनॉल काफी स्वच्छ ईंधन है। गाड़ियों में इसके इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में भारी कमी आएगी, जिससे भारत के वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।