आज जब भी हम सराफा बाजार जाते हैं या खबरों में सोने का भाव सुनते हैं, तो कीमतें सुनकर होश उड़ जाते हैं. आज 10 ग्राम सोना खरीदने के लिए जेब में डेढ़ लाख रुपये से भी ज्यादा होने चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब महज 100 रुपये से भी कम में 10 ग्राम सोना आ जाता था?
15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. इस खास मौके पर आइए वक्त के पहिए को थोड़ा पीछे घुमाते हैं और जानते हैं कि साल 1947 में आजादी के वक्त 10 ग्राम सोने की क्या कीमत थी और उस समय किए गए छोटे से निवेश की आज कितनी वैल्यू होती.
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1947 में कितना सस्ता था सोना?
आज जिस सोने का भाव घरेलू बाजार में 152,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर चल रहा है, साल 1947 में उसकी कीमत सिर्फ 88.62 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. हुई न हैरानी… जाहिर है उस दौर में लोगों की आमदनी भी आज के मुकाबले काफी कम थी और महंगाई भी न के बराबर थी. समय के साथ रुपए की वैल्यू घटती गई और महंगाई बढ़ती गई. पिछले 80 सालों में सोने की कीमतों में 1700 गुने से ज्यादा की भारी बढ़त दर्ज की गई है.
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आजादी के समय के 5000 की आज कितनी है कीमत?
आज के दौर में 5000 रुपये में 1 ग्राम सोना भी मिलना नामुमकिन है. लेकिन 1947 में 5000 रुपये की ताकत बहुत ज्यादा थी. साल 1947 में 5000 रुपये में कोई भी आसानी से 500 ग्राम (आधा किलो) से अधिक सोना खरीद सकता था. अगर आपके दादा जी या परदादा जी ने आजादी के समय सोने में केवल 5000 रुपये का निवेश किया होता, तो 1726 गुना उछाल के हिसाब से उस सोने की कीमत आज 86 लाख रुपये से भी ज्यादा होती.
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परंपरा और निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया
भारत में सोना सिर्फ एक धातु या निवेश नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. दिवाली, धनतेरस और अक्षय तृतीया जैसे शुभ मौकों पर सोना खरीदना बेहद पवित्र माना जाता है. शादी, सालगिरह और जन्मदिन जैसे खास अवसरों पर सोने के आभूषण देना हमारी पुरानी परंपरा रही है.
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भले ही बीच-बीच में सोने-चांदी के दामों में उतार-चढ़ाव आता रहता है, लेकिन लंबे समय (Long Term) में सोने ने हमेशा निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. आज भी आम आदमी कीमतों में थोड़ी गिरावट का इंतजार कर रहा है ताकि वह अपनी जरूरत और परंपरा के हिसाब से खरीदारी कर सके.
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