भारतीय परिवारों में सोने को हमेशा एक सुरक्षित निवेश और संकट का साथी माना जाता है, लेकिन वर्तमान में सराफा बाजार में एक बिल्कुल उलटा और हैरान करने वाला ट्रेंड देखने को मिल रहा है. देश के आम परिवारों में इस समय अपना पुराना सोना और ज्वेलरी बेचने की भारी होड़ मची हुई है. लोग पुरानी ज्वेलरी के बदले नया गहना खरीदने के बजाय सीधे कैश हाथ में लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
क्यों मची है सोना बेचने की होड़?
साल की शुरुआत में सोने की कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई यानी करीब 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. हालांकि, हाल के हफ्तों में आई बड़ी गिरावट के बाद अब यह 1.4 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है.
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टाइम्स ऑफ इंडिया ने इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के हवाले से लिखा है, 'भारतीयों में यह डर बैठ गया है कि सोने की कीमतें जो कभी शिखर पर थीं, वे अब और गिरकर 1.2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती हैं. इसी भारी गिरावट के डर से लोग कीमतों के और नीचे जाने से पहले अपने पास रखे सोने को बेचकर भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं.'
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IBJA के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून की तिमाही के दौरान भारतीय परिवारों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेचा है. पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में यह आंकड़ा 43 फीसदी का भारी उछाल दर्शाता है.
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भारत के लिए क्यों अच्छी है ये खबर?
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन अपनी जरूरतों के लिए वह पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर है. भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 72.4 बिलियन यूएस डॉलर का सोना आयात किया था.
भारतीय परिवारों के पास अनुमानित तौर पर करीब 30,000 टन सोना जमा है. साल 2025 में रीसायकल किए गए सोने का योगदान 125-150 टन था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि पुराना सोना बाजार में आने का यही ट्रेंड जारी रहा, तो साल 2026 में रीसाइक्लिंग का यह आंकड़ा 200-250 टन तक पहुंच सकता है.