'Burger King' के नाम पर पुणे में छिड़ी बहस, कोर्ट तक पहुंचा मामला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे के एक बर्गर जॉइंट को ट्रेडमार्क उल्लंघन करने वाली अपील के निपटारे तक ‘बर्गर किंग’ नाम का उपयोग करने से रोक दिया।
Edited By Ankita Pandey

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Burger King Trademark: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक निचली अदालत द्वारा दी गई अंतरिम राहत को जारी रखा और पुणे स्थित एक बर्गर जायंट को ट्रेडमार्क उल्लंघन का दावा करने वाले अमेरिकी बर्गर ब्रांड द्वारा दायर अपील के निपटारे तक ‘बर्गर किंग’ नाम का उपयोग करने से रोक दिया। इसका मतलब यह है कि रेस्तरां कोर्ट के अगले आदेश तक इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। बता दें कि उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई के पुणे न्यायालय के आदेश के प्रभाव और कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें अमेरिकी-आधारित फर्म के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को खारिज कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अपील लंबित रहने तक पुणे के रेस्तरां और अन्य को बर्गर किंग के प्रसिद्ध ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने से भी रोक दिया।
मल्टीनेशनल फास्ट-फूड कॉरपोरेशन ने पुणे के ईस्ट स्ट्रीट पर स्थित ‘बर्गर किंग’ नाम के एक ईटरी पर मुकदमा दायर किया है, जिसके मालिक अनाहिता ईरानी और शापूर ईरानी हैं। इस पर ट्रेडमार्क कानूनों के उल्लंघन का आरोप है। लंबित कानूनी कार्यवाही के बाद, पुणे के जॉइंट ने खुद को ‘बर्गर’ कहना शुरू कर दिया।
न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर और राजेश एस पाटिल की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ‘अंतिम तथ्य-खोज अदालत होगी, जहां पहली अपील की अंतिम सुनवाई के समय पूरे साक्ष्य पर गौर किया जाएगा। इसलिए, इसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चेन को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत को अपील के निपटान तक जारी रखने की जरूरत है।
पीठ ने पाया कि वादी अमेरिकी फर्म का सिंबल ‘पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है’ और भारत में इसे 1979 में ‘बर्गर किंग’ ट्रेडमार्क मिला और जबकि पुणे ईटरी ने 1992 में ट्रेडमार्क अपनाया। पीठ ने कहा कि हमारे अनुसार इस रेस्तरां का ट्रेडमार्क का पूर्व यूजर होने के बारे में किया गया दावा गलत है, क्योंकि अमेरिकी कंपनी भारत के बाहर वर्ष 1954 में और भारत में 25 अप्रैल, 1979 से इस मार्क के साथ रजिस्टर है।

26 अगस्त को उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था और पुणे स्थित ईटरी को कंपनी के अंतरिम आवेदन के लंबित रहने तक नाम का उपयोग करने से रोक दिया था। इस साल की शुरुआत में पारित एक आदेश में, पुणे जिला न्यायालय के न्यायाधीश सुनील वेदपाठक ने कहा था कि रेस्तरां 1992 से इस नाम का उपयोग कर रहा था, और भारत में इस ट्रेडमार्क का पूर्व यूजर था, अमेरिकी कंपनी द्वारा देश में व्यवसाय शुरू करने से बहुत पहले और इसलिए, इसने ट्रेडमार्क का उल्लंघन नहीं किया था।
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