अगर आप सोच रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में चल रही खटपट का आपसे क्या लेना-देना है, तो आपको अपनी गाड़ी के पेट्रोल टैंक की तरफ एक बार देख लेना चाहिए. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ रहा है.

दोनों देश अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं. ताजा खबर यह है कि ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ बड़ी शर्तें रखी हैं और धमकी दी है कि अगर ये शर्तें नहीं मानी गईं, तो वह दुनिया के सबसे जरूरी तेल व्यापार का रास्‍ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को साल 2029 तक बंद कर देगा.

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2029 तक होर्मुज बंद करने की धमकी

सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि ईरान ने एक बड़ा ऐलान किया है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसकी सभी शर्तें नहीं मान लेते, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाएगा. साल 2029 में ट्रंप का कार्यकाल खत्म होगा, यानी ईरान 2029 तक इस रास्ते से होने वाले तेल व्यापार को ठप करने की धमकी दे रहा है.

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ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं ये 6 बड़ी शर्तें
ईरान ने कोई छोटी-मोटी मांग नहीं की है, बल्कि अमेरिका के सामने एक लंबी-चौड़ी लिस्ट रख दी है. जैसे क‍ि

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  1. 300 अरब डॉलर का मुआवजा: ईरान को हुए नुकसान की भरपाई.
  2. संपत्ति की वापसी: अमेरिका ने ईरान की 100 अरब डॉलर की संपत्ति जो फ्रीज की है, उसको तुरंत रिलीज किया जाए.
  3. प्रतिबंध हटें: ईरान पर लगे सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध पूरी तरह से हटाए जाएं.
  4. अमेरिकी सेना की वापसी: पूरे मिडिल ईस्ट इलाके से अमेरिकी सैनिक वापस बुलाए जाएं.
  5. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म हो: समुद्र में ईरान की घेराबंदी तुरंत रोकी जाए.
  6. ट्रांज‍िट फीस: जहाजों के गुजरने पर ट्रांज़िट फ़ीस (टोल टैक्स जैसी फीस) को मंजूरी दी जाए.

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पीछे हटने को तैयार नहीं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप भी पीछे हटने वालों में से नहीं हैं. ईरान की इन शर्तों के जवाब में ट्रंप ने भी अपनी शर्त रख दी है. अमेरिका का कहना है कि तेहरान (ईरान) की वजह से जिन लोगों की जान गई है, ईरान पहले उनका मुआवजा दे. फिलहाल अमेरिका नए सैन्य हमलों के बजाय ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
इस पूरी राजनीतिक खींचतान और ईरान-ओमान समझौते में हो रही देरी का सीधा असर शेयर बाजार और तेल बाजार पर दिख रहा है. मंगलवार (11 अगस्त) सुबह 6:20 बजे तक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 87.95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. जबक‍ि WTI क्रूड 82.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. बाजार में डर का माहौल है और इसी अनिश्‍च‍ितता के कारण तेल के दाम तेजी से ऊपर भाग रहे हैं.

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भारत और आम जनता पर क्या होगा असर?
अब आते हैं सबसे जरूरी सवाल पर कि इस युद्ध जैसे हालात से भारत का क्या नुकसान है? अगर 2029 तक होर्मुज का रास्ता बंद रहता है, तो भारत को तेल सप्लाई के लिए दूसरे महंगे रास्ते और देश खोजने पड़ेंगे. इससे देश का तेल आयात बिल बहुत बढ़ जाएगा. कच्चा तेल महंगा होने का मतलब है ट्रांसपोर्टेशन महंगा होना. इससे खाने-पीने से लेकर हर जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं.

राहत की बात यह है कि अभी तक भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं. लेकिन, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में यह आग लंबे समय तक लगी रही, तो इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा और पेट्रोल पंप पर आपको ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.

अमेरिका और ईरान की यह लड़ाई सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है. यह एक ग्लोबल संकट बन चुका है. अगर जल्द ही कोई शांति समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया भर में तेल संकट और महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा.