आम जनता के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक नई चिंताजनक खबर आ रही है. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखने को मिली है. ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव प्रति बैरल 91 डॉलर के पार निकल गया है, जो जुलाई के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है.
वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी लगभग 85 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है. आइए जानते हैं कि क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक यह उछाल क्यों आया है और वैश्विक हालात क्या इशारा कर रहे हैं.
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अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेत नहीं
कच्चे तेल के दामों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच खत्म न होता तनाव है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन ईरान के साथ किसी भी समझौते को आगे बढ़ाने की जल्दबाजी में नहीं है. जून में दोनों देशों के बीच हुआ समझौता सोमवार को खत्म हो चुका है और नए समझौते पर सहमति बनती नहीं दिख रही है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर घमासान
मिडिल ईस्ट से दुनिया भर में भेजे जाने वाले तेल के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. ईरान इस रास्ते के मैनेजमेंट को लेकर ओमान से बातचीत कर रहा है, जिसमें अमेरिका शामिल नहीं है. दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों (एनर्जी सेक्रेटरी और ट्रेजरी सेक्रेटरी) ने साफ कर दिया है कि वे ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव लंबा खींचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
इस साल 50% तक महंगा हो चुका है कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में जारी इस भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव के कारण इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% का बड़ा उछाल आ चुका है. हालांकि, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश होर्मुज के इस मुख्य रास्ते के बजाय दूसरे रास्तों से तेल की सप्लाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं.
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भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल बाहर से आयात (Import) करता है. ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $91 के ऊपर बना रहता है, तो इससे देश में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ कई जरूरी चीजों के दाम प्रभावित हो सकते हैं. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले क्रूड इन्वेंट्री डेटा पर टिकी है.
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