अगर आप सोच रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही उथल-पुथल का आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, तो इस खबर को ध्यान से समझें. ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई पर एक बार फिर बड़ा संकट मंडराने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच बयानों की तीखी जंग और नई शर्तों के चलते कच्चे तेल की कीमतें पिछले 5 दिनों से लगातार भाग रही हैं.
बुधवार, 12 अगस्त 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, जबकि WTI क्रूड भी 83 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है. महज 5 दिनों में तेल की कीमतों में करीब 12% का बड़ा उछाल आ चुका है. आइए जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच का यह विवाद क्या है और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है.
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अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव?
कच्चे तेल में आई इस ताजा आग के पीछे दोनों देशों के बीच शुरू हुई मुआवजे की जंग है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने शर्त रखी है कि अमेरिका जब तक पिछले 5 महीनों के युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई (300 अरब डॉलर का मुआवजा) नहीं करता और आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा.
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इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर मुआवजा देना ही है, तो पहले ईरान अमेरिका को दे. उन्होंने मिडिल ईस्ट संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग रख दी है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना अहम?
दुनिया भर में होने वाले कुल कच्चे तेल के व्यापार का 20% से 25% हिस्सा अकेले इसी समुद्री रास्ते (होर्मुज जलडमरूमध्य) से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कतर और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से दुनिया भर में क्रूड ऑयल और गैस भेजते हैं. अगर ईरान इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है, तो रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई ठप हो जाएगी और बाजार में तेल की भारी किल्लत हो जाएगी.
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भारत पर इसका क्या और कितना असर पड़ेगा?
भारत के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड $89 के पार जाने से भारत का आयात बिल बहुत बढ़ जाएगा. अगर कच्चे तेल में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारतीय तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं.
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से माल ढुलाई (Transport) महंगी हो जाएगी. इसका सीधा असर सब्जियों, फल, राशन और दैनिक जरूरतों के सामान की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है.