Vakri Shani Impact: द्रिक पंचांग के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को रात 01:25 बजे से शनि मीन राशि में वक्री हो चुके हैं. वैदिक ज्योतिष में शनि कर्म, न्याय, अनुशासन और कर्मफल के कारक और स्वामी ग्रह माने जाते हैं. यही कारण है कि शनि की वक्री चाल को महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना माना जाता है, जिसका प्रभाव केवल राशियों और व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया पर भी पड़ता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि के वक्री रहने के दौरान राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्रशासन, मौसम और प्राकृतिक घटनाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलते रहे हैं. ऐसा पूर्व का ज्योतिष आकलन और अनुभव है.
यह देखा गया है कि इस दौरान सामाजिक उथल-पुथल, दुर्घटनाएं और अप्रत्याशित परिस्थितियों की संभावनाएं भी बढ़ी हुई रहती हैं. आइए ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य से जानते हैं कि 27 जुलाई से वक्री होकर उल्टी चाल चल रहे और कुल 138 दिन तक वक्री रहने वाले शनि का विश्व घटनाओं और मौसम से क्या संबंध जुड़ सकता है और क्या-क्या बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं?
बदलेगा मौसम का मूड
ज्योतिषाचार्य शांडिल्य बताते हैं कि शनि के मीन राशि में वक्री होने का असर मौसम पर भी देखने को मिल सकता है. कहीं जरूरत से ज्यादा बारिश हो सकती है. कहीं बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति बन सकती है. खासकर पहाड़ी और तटीय इलाकों में ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत मानी जाती है.
वहीं कुछ जगहों पर बारिश कम होने से सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं. पानी, नदियों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रह सकते हैं. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में भूगर्भीय हलचल की आशंका भी बनी रहेगी.
यह भी पढ़ें: Vastu Tips: घर हो या दुकान, तिजोरी की सही जगह क्या है? जानें कुबेर दिशा के वास्तु नियम और धन वृद्धि के उपाय
शेयर बाजार की हाई वोल्टेज हलचल
वक्री शनि के दौरान आर्थिक मोर्चे पर भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. शेयर बाजार कभी तेज भाग सकता है, तो कभी अचानक फिसल सकता है. पेट्रोलियम, गैस, धातु और नेचुरल रिसोर्स से जुड़े सेक्टर ज्यादा चर्चा में रह सकते हैं. ग्लोबल ट्रेड का असर भी साफ दिख सकता है.
राजनीति में बदलाव की हलचल
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह समय राजनीति और प्रशासन में बड़े बदलाव का संकेत भी दे सकता है. बड़े पदों पर फेरबदल हो सकते हैं. नई नीतियां सामने आ सकती हैं. सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो सकता है. कुछ बड़े कानूनी फैसले भी सुर्खियों में रह सकते हैं. कई नेताओं के लिए यह समय खुद को साबित करने वाला माना जाता है.
इन राशियों को रहना होगा अलर्ट
शनि की वक्री चाल का सबसे ज्यादा असर उन राशियों पर माना जाता है, जो पहले से शनि की साढ़ेसाती से गुजर रही हैं. कुंभ, मीन और मेष राशि के जातकों को मानसिक दबाव, कामों में देरी, अचानक बढ़ते खर्च और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे समय में धैर्य, अनुशासन और सोच-समझकर फैसले लेना बेहतर माना गया है.
ये रहेगा शनि का असली मैसेज
ज्योतिष में शनि की वक्री चाल को सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि सेल्फ रिव्यू का समय भी माना जाता है. यानी अपने पुराने फैसलों, अधूरे कामों और जिम्मेदारियों पर दोबारा नजर डालने का मौका. इस दौरान धैर्य रखना, अनुशासन बनाए रखना और लॉन्ग टर्म प्लानिंग पर फोकस करना बेहतर माना जाता है. जल्दबाजी के बजाय स्मार्ट डिसीजन लेना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: पति-पत्नी की ये 5 गलतियां बन जाती हैं गरीबी और कलह की बड़ी वजह, आज ही छोड़ें
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
संबंधित खबरें
आज नवरात्रि का आरंभ, जानिए कैसा रहेगा सभी राशियों का दिन, पढ़ें राशिफल
10 hrs agoतुला और मकर राशि के लिए जरूरी सलाह, पंडित सुरेश पांडेय से जानिए
1 day agoअमावस्या पर इन 5 राशियों को रहना होगा सावधान, पढ़ें आज का राशिफल
1 day agoपितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ अमावस्या के उपाय, शुभ फल देंगे पितृ
2 days agoशुक्रवार को इन 4 राशियों के लिए बनेंगे धनलाभ के योग, पढ़ें आज का राशिफल
2 days agoआज इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, पढ़ें 8 अक्टूबर 2026 का राशिफल
3 days agoकरियर-कारोबार के लिए अच्छा रहेगा इन 5 राशियों का दिन, पढ़ें आज का राशिफल
4 days agoलीडरशिप क्वालिटी से भरे होते हैं इन 2 मूलांक के लोग, हासिल करते हैं सफलता
5 days agoइंदिरा एकादशी पर इन 4 राशियों के लिए अच्छा रहेगा दिन, पढ़ें आज का राशिफल
5 days ago31 अक्टूबर से पहले मीन राशि के लिए शुभ संयोग, कर लें जरूरी काम
6 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines