साल 2026 में आसमान में एक और बड़ी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा. खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए ये एक खास अवसर होगा, क्योंकि सूर्य ग्रहण हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है. हालांकि भारत के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बात है कि ये ग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा.
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क्यों खास है ये सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी को ढक देता है. इस दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य आंशिक या पूरी तरह से छिपा हुआ दिखाई देता है. वैज्ञानिक दृष्टि से ये एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन भारतीय परंपरा और ज्योतिष में इसका खास महत्व माना जाता है. 12 अगस्त 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण दुनिया के कई देशों में देखा जा सकेगा, लेकिन भारत में इसकी विजिबिलिटी नहीं होगी. यही वजह है कि इस ग्रहण को लेकर भारत में सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सूतक काल तभी असरदार होता है जब ग्रहण उस जगह पर दिखाई दे.
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कब लगा था ऐसा सूर्य ग्रहण?
इससे पहले साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगा था. वो एक रिंग शेप सूर्य ग्रहण था, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' के नाम से भी जाना जाता है. उस ग्रहण की शुरुआत भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 3:26 बजे हुई थी और ये शाम 7:57 बजे तक चला था. हालांकि वो भी भारत में दिखाई नहीं दिया था. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए. इसे देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर या प्रमाणित ग्रहण चश्मों का इस्तेमाल करना जरूरी होता है. बिना सुरक्षा के सूर्य ग्रहण देखने से आंखों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. खगोल विज्ञान के क्षेत्र में सूर्य ग्रहण का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. वैज्ञानिक इन घटनाओं के माध्यम से सूर्य की बाहरी परत, कोरोना और बाकी खगोलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करते हैं.
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