Swati Pandey
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Karwa Chauth 2023: करवा चौथ व्रत हर एक शादीशुदा महिला के लिए बहुत ज्यादा मायने रखता है। इस दिन हर महिला अपने पति की दीर्घायु की कामना में निर्जला व्रत करती है और चांद को देखकर पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलती है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके चन्द्रमा की पूजा करती हैं और अर्घ्य देती हैं। करवा चौथ के दिन महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से व्रत एवं पूजन करती हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए प्रयास करती हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 1 नवंबर दिन बुधवार को है। अखंड सौभाग्य की कामना से रखा जाने वाला करवा चौथ व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को होता है। इस बार करवा चौथ व्रत 13 घंटे 42 मिनट की अवधि का होगा। सूर्योदय से चंद्रोदय तक यह व्रत रखते हैं। हालांकि करवा चौथ व्रत के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखते हैं, ताकि व्रत असफल न हो। करवा चौथ पर कौन से काम नहीं करने चाहिए।
करवा चौथ का व्रत निर्जला होता है। करवाचौथ वाले दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत की शुरूआत करते है। फिर पूरे दिन अन्न-जल ग्रहण नही करते हैं। इस दिन गलती से भी अन्न और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए, वरना आपका व्रत टूट जाएगा और आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा।
मान्यता है, कि करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है, इसलिए उस दिन सुहाग से जुड़ी सामग्री जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, महावर, मेहदी आदि का दान किसी को नहीं करनी चाहिए
करवा चौथ व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत का पारण करते हैं। करवाचौथ बिना चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य दिए पारण न करें। यदि आपके शहर में किसी कारणवश चांद न दिखे, तो ऐसे में ज्योतिष उपाय करके पूजा और अर्घ्य दें। फिर व्रत का पारण करें.
करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को दिन में सोना नहीं चाहिए। व्रत वाले दिन सोने से व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। वह निष्फल हो जाता है, साथ ही दोष भी लगता है। करवा चौथ समेत सभी व्रतों में दिन में नहीं सोना चाहिए। लेकिन जिनको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, वे स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर व्रत करें।
करवा चौथ सुहाग और दांपत्य का प्रतीक है। उस दिन काले रंग के कपड़े न पहनें। काले रंग को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। आप लाल, गुलाबी, पीले, हरे रंग, गहरे रंग के कपड़े पहन सकती हैं। पीला, लाल और गुलाबी को ज्यादा शुभ माना जाता है।
करवा चौथ की पूजा व्रत के बिना अधूरी होती है। शाम के समय में माता गौरी की पूजा करें तो करवा चौथ की व्रत कथा जरूर सुने। कथा सुनने से व्रत पूरा होगा और करवाचौथ व्रत का महत्व भी पता चलेगा।
करवा चौथ की पूजा के बाद अपनी सास को पूजा और सुहाग की सामग्री देना न भूले। आपको अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलेगा।
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