पाकिस्तान में महंगाई, गरीबी, भूखमरी, महामारी से लोग त्रस्त हैं। हालात यह हो गए हैं कि आज पाकिस्तान में लोगों के पास अंतिम संस्कार करने तक के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए कंगाल पाकिस्तान ने फिर भिखारी की तरह कटोरा उठाकर पैसे के लिए हाथ फैलाए हैं और इस बार कटोरे में भीख डालने के लिए वर्ल्ड बैंक ने हाथ बढ़ाए हैं। जी हां, वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को 375.9 मिलियन डॉलर का फंड देने का फैसला किया है, लेकिन देश की जनता के हालात जस के तस हैं।
वर्तमान में पाकिस्तान $138 बिलियन यानी 13800 करोड़ डॉलर यानी 13.15 लाख करोड़ का कर्जदार है। चीन, सऊदी अरब, विश्व बैंक, IMF समेत कई देशों और संस्थाओं से कर्ज ले चुका है, लेकिन फिर भी देश में गरीबी और भूखमरी है। आखिर देश में इतनी गरीबी क्यों है? पाकिस्तान को कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ती है? वर्ल्ड बैंक के अलावा और कौन-कौन इसे कर्ज देता है? कौन-कौन कर्ज दे चुका है और पाकिस्तान कर्ज लिए पैसे से क्या करता है? आइस विस्तार से जानते हैं…
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पाकिस्तान किस-किस से लेता कर्ज?
बता दें कि पाकिस्तान न सिर्फ मित्र देशों और बैंकों से कर्ज लेता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी कर्ज लिया है। वैसे पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कर्ज मित्र देश चीन ने दिया है। इाके अलावा पाकिस्तान ने मित्र देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भी लोन लिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक (World Bank)और एशियाई विकास बैंक (ADB) से भी पाकिस्तान लोन ले चुका है और सभी का लोन मिलाकर करीब 13.15 लाख करोड़ हो गया है।
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किस-किस से कितना कर्ज लिया?
बता दें कि पाकिस्तान मित्र देश चीन सबसे ज्यादा 28.8 बिलियन डॉलर कर्ज ले चुका है, जो उसके कुल कर्ज का 30 प्रतिशत हिस्सा है। चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बनाने के लिए लोन दिया हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से करीब 8.2 बिलियन डॉलर का कर्ज अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने, आर्थिक संकट से उबरने और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए लोन लिया है। पाकिस्तान ने किसी वित्तीय संस्था से अब तक का सबसे बड़ा लोन विश्व बैंक (World Bank) से लिया है, जिसकी रकम 22 बिलियन डॉलर है।
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देश में आर्थिक सुधार करने और ढांचागत विकास करने के लिए यह कर्ज लिया गया। देश के बुनियादी ढांचे के विकास और विकास परियोजनाओं के लिए पाकिस्तान ने एशियाई विकास बैंक (ADB) से 16.8 बिलियन डॉलर का लोन लिया हुआ है। सऊदी अरब से 5 से 8 बिलियन डॉलर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 3.5 बिलियन डॉलर लोन लिया है, जिसे पाकिस्तान ने अपने केंद्रीय बैंक में 'कैश डिपॉजिट' के तौर पर रखा हुआ है। पाकिस्तान इतना बड़ा कर्ज नहीं चुका सकता, इसलिए कर्ज देने वाले समयसीमा बढ़ा देते हैं।
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इतने पैसे की जरूरत क्यों पड़ती?
बता दें कि आमदनी कम और खर्च ज्यादा होने के कारण पाकिस्तान को कर्ज लेना पड़ता है। सबसे पहली बात पाकिस्तान की GDP पर लगने वाला टैक्स पूरी दुनिया में सबसे कम 9-10% है। इसलिए सरकार को कमाई नहीं होती और वह अपने सरकारी कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पाती। व्यापार घाटा भी खूब होता है, क्योंकि पाकिस्तान से कपड़े और चावल के अलावा देश कोई और चीज नहीं खरीदते। निर्यात कम होने के कारण इनकम नहीं होती।
पाकिस्तान तेल, गैस, मशीनरी, खाने-पीने का सामान और दवाइयां बाहर से मंगवाता है, इसलिए आयात यानी खर्च जाता है। यह आयात डॉलर में करना पड़ता है। इसलिए पाकिस्तान को लोन लेना पड़ता है। खर्च करने के लिए डॉलर की जरूरत भी पड़ती है। पाकिस्तान की सरकार के कुल बजट का बहुत बड़ा हिस्सा पहले से लिए हुए कर्जों का ब्याज चुकाने में खत्म हो जाता। दूसरा बड़ा हिस्सा सैन्य खर्च, सेना के रखरखाव और हथियारों की खरीद में चला जाता, इसलिए देश के विकास के लिए पैसे नहीं होते तो लोन लेना पड़ता है।
पुराने कर्ज को चुकाने के लिए पैसे की जरूरत पड़ती। इसलिए पाकिस्तान नए और पुराने कर्ज के जाल में फंसा है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) और बिजली विभाग अरबों का घाटा झेल रहे हैं। इन दोनों के लिए सरकार को लोन लेना पड़ता है। पाकिस्तान की किसी सरकार का 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं होता, इसलिए विदेशी कंपनियां पाकिस्तान में निवेश (FDI) नहीं करती और सरकार को आय नहीं होती।
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कितनी है GDP और प्रति व्यक्ति आय?
एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की वर्तमान (GDP $386.50 अरब है, जो बेहद कम है। अंतरराष्ट्रीय एशियाई विकास बैंक (ADB) और पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में पाकिस्तान की GDP में 3.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय (per capita income)1901 डॉलर यानी 181384.87 रुपये प्रति व्यक्ति है। इसके अलावा पाकिस्तान की GDP का आकार 2.15 ट्रिलियन डॉलर है। GDP में एग्रीकल्चर सेक्टर का योगदान 23.44, इंडस्ट्री सेक्टर का 18.14 और सर्विस सेक्टर का 58.42 प्रतिशत है। अगर पाकिस्तान में मुद्रास्फीति यानी महंगाई की बात करते तो उसकी दर 7.2 प्रतिशत के आस-पास है, यानी देश बहुत ज्यादा गरीब है और लोन लेने के बावजूद गरीबी-महंगाई कम नहीं होती।