580 मिलियन डॉलर खर्चे, फिर भी नहीं मिली एंट्री… ब्रिक्स के बाहर क्यों है पाकिस्तान; चीन- रूस की सिफारिश भी नहीं आई काम

ब्रिक्स शुरूआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह था. 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ.

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मॉस्को और बीजिंग की सहमति के बावजूद पाकिस्तान की सदस्यता आगे नहीं बढ़ पा रही है. (Image - PTI/ANI)

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पाकिस्तान ने साल 2023 में ही ब्रिक्स (BRICS) में शामिल होने के लिए औपचारिक अर्जी दी थी. इसके बाद जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को नए सदस्यों के रूप में शामिल कर समूह को ‘ब्रिक्स प्लस’ बना दिया गया, तब भी इस्लामाबाद इसमें एंट्री नहीं ले पाया. चीन और रूस के समर्थन के बावजूद नई दिल्ली का रुख पाकिस्तान की सदस्यता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है.

आर्थिक संकट और IMF से दूरी बनाने की कोशिश

पाकिस्तान लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था की वजह से ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है. पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, देश की जीडीपी विकास दर 3.70 फीसदी के निचले स्तर पर दर्ज की गई है. निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक पर भारी निर्भरता कम करने के नए विकल्प तलाशने के लिए पाकिस्तान ने ब्रिक्स समर्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में 580 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी भी खरीदी है.

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ग्लोबल साउथ में ब्रिक्स का दबदबा

पाकिस्तान का यह आवेदन ऐसे समय में आया जब ब्रिक्स ‘ग्लोबल साउथ’ के सबसे प्रभावी मंच के रूप में उभरा है. ब्रिक्स अब दुनिया की करीब 49 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. इसके साथ ही ग्लोबल जीडीपी में ब्रिक्स का करीब 40 फीसदी हिस्सा है.

दूसरी ओर, ब्रिक्स के भीतर भारत का व्यापारिक और कूटनीतिक कद तेजी से बढ़ा है. ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात 48.8 फीसदी की भारी उछाल के साथ 64.3 बिलियन डॉलर से बढ़कर 95.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इसके साथ ही भारत का प्रभाव मजबूत हुआ है.

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इस्लामाबाद की रूस से गुहार

नवंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की तत्कालीन प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने पुष्टि की थी कि देश ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा है. उन्होंने कहा था कि ब्रिक्स विकासशील देशों का एक अहम ग्रुप है और इसमें शामिल होकर पाकिस्तान समावेशी बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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इसके साथ ही, रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने रूसी समाचार एजेंसी ताश को बताया था कि उनका देश सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते सदस्य देशों के संपर्क में है और उसने विशेष रूप से मॉस्को से मदद मांगी है.

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भारत का रुख क्यों बन गया है दीवार?

मॉस्को और बीजिंग की सहमति के बावजूद पाकिस्तान की सदस्यता आगे नहीं बढ़ पा रही है. इसकी मुख्य वजह ब्रिक्स का ‘सर्वसम्मति-आधारित प्रवेश नियम’ है. इस नियम के तहत किसी भी नए देश को पूर्ण सदस्य या पार्टनर देश का दर्जा देने के लिए सभी मौजूदा सदस्य देशों की 100 फीसदी सहमति जरूरी होती है. भारत अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की एंट्री पर आपत्ति जताता रहा है.

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2024 में हुआ था विस्तार

ब्रिक्स शुरूआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह था. 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ. बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने. भारत 12 और 13 सितंबर को ‘भारत मंडपम’ में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली. 2026 में, ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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