चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वीं ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं. उनके साथ सफेद बालों वाले एक लंबे कद के वरिष्ठ अधिकारी भी आए हैं. यह शख्स हैं काई की. इन्हें आज चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली नेता और राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ‘राइट-हैंड’ माना जाता है. गलवान घाटी में झड़प के बाद करीब सात साल बाद जिनपिंग पहली बार भारत के दौरे पर आए हैं. काई की के अलावा चीन के विदेश मंत्री और सीपीसी केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य वांग यी भी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं.
साए की तरह रहते हैं जिनपिंग के साथ
लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले काई की हाल के महीनों में इंटरनेशनल प्लेटफॉर्मस पर काफी एक्टिव दिखे हैं. पिछले साल तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इसके अलावा 2025 में दक्षिण कोरिया में जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान वे मौजूद थे. वहीं, इस साल जब ट्रंप चीन दौरे पर पहुंचे, तो हाथ मिलाने वाले पहले चीनी अधिकारी काई की ही थे.
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रॉकेट की रफ्तार से प्रमोशन
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर काई की जिस तरह बड़े नेता बनकर उभरे हैं, वह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. बीजिंग के मेयर के रूप में कुछ ही महीने काम करने के बाद उन्हें सीधे बीजिंग कम्युनिस्ट पार्टी का प्रमुख बनाया गया. इसके बाद उन्हें साल 2017 में सीधे देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली इकाई ‘पोलित ब्यूरो’ में शामिल कर लिया गया. पोलित ब्यूरो में शामिल होने के लिए आमतौर पर कम से कम 5 साल का इंतजार करना पड़ता है. 2022 में उन्हें पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में जगह मिली.
अभी 70 वर्षीय काई की सीपीसी के जनरल ऑफिस के प्रमुख हैं. ये ही शी जिनपिंग के ‘डिफैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ होते हैं. वह पार्टी की विचारधारा तय करने वाले संस्थान सेंट्रल आइडियोलॉजी स्कूल के भी चीफ हैं.
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जिनपिंग के इतने भरोसेमंद कैसे बने?
जिनपिंग और काई की दोनों का ही बैकग्राउंड एक जैसा रहा है. दोनों ने सांस्कृतिक क्रांति के दौरान जमीनी स्तर से काम की शुरुआत की थी. काई और शी जिनपिंग ने फुजिआन और झेजियांग प्रांत में दो दशक से ज्यादा समय तक एक साथ काम किया. यहीं से दोनों के बीच दोस्ती गहरी हुई.
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7 साल बाद जिनपिंग का भारत दौरा
राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आए हैं. शी जिनपिंग इससे पहले साल 2019 में चेन्नई के निकट मामल्लपुरम में मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे. 2016 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने गोवा आए थे. राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा सितंबर 2014 में हुई थी, जब उन्होंने पीएम मोदी के साथ विस्तृत वार्ता की थी.
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