अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए कुछ टैरिफ पर अब रोक लगने जा रही है. अमेरिकी सरकार ने साफ किया है कि 24 फरवरी से इन टैरिफ की वसूली नहीं की जाएगी. ये फैसला यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट के एक अहम आदेश के बाद लिया गया है. दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने ने विदेशी सामानों पर भारी टैरिफ लगाए थे. इन टैरिफ का मकसद अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों से कॉम्पटीशन को कम करना था. इसके लिए ट्रम्प सरकार ने एक आपातकालीन कानून का सहारा लिया था.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस कानून के तहत ये टैरिफ लगाए गए थे, वो राष्ट्रपति को इस तरह के व्यापार शुल्क लगाने की इजाजत नहीं देता. कोर्ट के मुताबिक, टैरिफ लगाने का हक सिर्फ राष्ट्रपति के पास नहीं है. इसी वजह से इन टैरिफ को अवैध करार दिया गया. कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने तुरंत कार्रवाई की. एजेंसी ने अपने सिस्टम से इन टैरिफ से जुड़े कोड हटा दिए हैं, ताकि 24 फरवरी के बाद इनकी वसूली अपने आप बंद हो जाए. हालांकि, ये रोक सिर्फ उन्हीं टैरिफ पर लगेगी जिन्हें कोर्ट ने अवैध माना है. राष्ट्रीय सुरक्षा या चीन से जुड़े बाकी टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे.
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कैसा असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि इन टैरिफ से अमेरिका को अब तक अरबों डॉलर की कमाई हुई है. अब ये भी चर्चा चल रही है कि क्या कंपनियों को पहले वसूले गए पैसे वापस मिलेंगे या नहीं. इस पर आगे अलग से कानूनी प्रक्रिया हो सकती है. इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. कई देशों ने इसे व्यापार के लिए पॉजिटिव कदम बताया है, जबकि कुछ का मानना है कि इससे अमेरिकी नीति में अनिश्चितता बढ़ेगी. कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अमेरिका की बिजनेस पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. आने वाले समय में इसका असर ग्लोबल मार्केट और अमेरिकी राजनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है.
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