ईरान पर हमले की तैयारी के लिए मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहे अमेरिका के सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड के सामने एक अजीबोगरीब चुनौती खड़ी हो गई है. दुनिया के इस सबसे महंगे और हाईटेक विमान वाहक युद्धपोत पर तैनात करीब 4000 से अधिक सैनिक इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. जहाज पर लगा आधुनिक सीवेज सिस्टम पूरी तरह चोक हो गया है जिसके कारण सैनिकों के सामने शौच का बड़ा संकट पैदा हो गया है. हालत इतनी खराब हो चुकी है कि नौसैनिकों को शौचालय जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है जिसका सीधा असर उनकी सेहत और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है.
अरबों की लागत और सिस्टम खराब
करीब 13 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 1.18 लाख करोड़ की भारी भरकम लागत से बने इस जहाज को अमेरिकी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है. 4,600 नाविकों की क्षमता वाले इस युद्धपोत में वैक्यूम कलेक्शन और होल्डिंग सिस्टम लगाया गया है जो कम पानी के इस्तेमाल से सफाई करता है. मगर अब यही सिस्टम इस आलीशान जहाज की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है. भारी भरकम बजट खर्च करने के बावजूद जहाज का सीवेज सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है. यह विडंबना ही है कि जो जहाज अपनी मिसाइलों से किसी देश को तबाह करने की ताकत रखता है वह अपने क्रू को बुनियादी स्वच्छता तक नहीं दे पा रहा है.
यह भी पढ़ें: चीन ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, अमेरिका ने रूस-फ्रांस-ब्रिटेन से मांगी मदद, जानें क्या है न्यूक्लियर प्रोग्राम का विवाद?
लंबी कतारें और बीमार होते नौसैनिक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जहाज पर शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि कई बार 90 फीसदी टॉयलेट काम करना बंद कर देते हैं. सैनिकों को एक बार शौचालय इस्तेमाल करने के लिए 45-45 मिनट तक लंबी कतारों में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है. साल 2023 से अब तक दर्जनों बार बाहरी मैकेनिकों की मदद ली जा चुकी है लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है. इंजीनियरिंग टीम को 19-19 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ रही है ताकि सिस्टम को चालू रखा जा सके. इस गंदगी और परेशानी की वजह से नौसैनिकों की तबीयत बिगड़ रही है जो युद्ध की तैयारियों के बीच एक चिंताजनक बात है.
अमेरिकी तैयारियों पर उठ रहे गंभीर सवाल
ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर हमले की बढ़ती धमकियों के बीच इस टॉयलेट संकट ने अमेरिकी नौसेना की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है. दुनिया का सबसे शक्तिशाली माना जाने वाला यह विमानवाहक पोत दुश्मन से लड़ने से पहले अपने ही आंतरिक खराब सिस्टम से जूझ रहा है. अगर सैनिकों का स्वास्थ्य इसी तरह गिरता रहा तो ईरान जैसे मजबूत दुश्मन के खिलाफ उनकी लड़ने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है. युद्ध की बड़ी-बड़ी बातों के बीच इस जमीनी हकीकत ने दिखा दिया है कि तकनीकी रूप से कितना भी उन्नत जहाज क्यों न हो लेकिन अगर बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त नहीं हैं तो वह जंग के मैदान में कमजोर साबित हो सकता है.
संबंधित खबरें
हूती हमलों के बाद 17 अक्टूबर तक बंद रहेगा सऊदी अरब का रियाद एयरपोर्ट
5 hrs agoजम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में LoC के पास IED ब्लास्ट, 4 आतंकी ढेर
7 hrs agoसऊदी और हूती विद्रोहियों के बीच सुलह कराएगा ईरान? तेहरान ने दिए अहम संकेत
12 hrs agoअर्थशास्त्र में रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मिला नोबेल पुरस्कार
12 hrs agoअल नीनो ने रेगिस्तान में खिला दिए फूल, जानें- कैसे बदल रहा दुनियाभर का मौसम
14 hrs agoनेपाल में 'जलप्रलय' ने फिर मचाई तबाही, नदी में सैलाब में बहे 40 घर और 6 पुल
16 hrs agoमिसाइल गिरते ही कैसे जान बचाकर भागे जायरीन? रियाद एयरपोर्ट का आया VIDEO
18 hrs agoसूडान में सोने की खदान पर मिसाइलों से भयंकर हमला, 72 लोगों की मौत
19 hrs agoरामविलास पासवान की जयंती अब होगी राजकीय समारोह, बिहार कैबिनेट का ऐलान
20 hrs agoईरान का डोनाल्ड ट्रंप को झटका, होर्मुज खोलने को अमेरिका का जवाब किया खारिज
21 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines