अमेरिका में हायर एजुकेशन का सपना देख रहे और वहां पढ़ रहे दूसरे देशों के स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक नए कड़े नियम को अंतिम रूप दे दिया है. इस नियम के तहत विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि को अधिकतम 4 साल के लिए फिक्स कर दिया गया है. इस नए बदलाव ने दशकों पुराने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया है. इस फैसले का सबसे बड़ा असर 3.3 लाख से ज्यादा भारतीय छात्रों पर पड़ने जा रहा है, जो वर्तमान में अमेरिका के कई यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं.
क्या है नया नियम?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को जारी इस नए नियम के तहत F-1 वीजा पर आने वाले दूसरे देश के छात्र अब अमेरिका में सामान्य तौर पर केवल 4 साल तक ही कानूनी रूप से रह सकेंगे. अगर किसी छात्र की पढ़ाई 4 साल से ज्यादा समय की है, तो उसे अपनी तय अवधि समाप्त होने से पहले डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी से स्पेशल एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा और मंजूरी लेनी होगी.
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दशकों से चले आ रहे पुराने नियम के मुताबिक, F-1 वीजा धारक छात्रों को कोई फिक्स एक्सपायरी डेट नहीं दी जाती थी. वे तब तक अमेरिका में रह सकते थे, जब तक वे फुल-टाइम पढ़ाई कर रहे थे और वीजा की शर्तों का पालन कर रहे थे. लेकिन अब यह सहूलियत पूरी तरह खत्म हो गई है. यह नया नियम न केवल F-1 छात्रों पर, बल्कि J-1 एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों को मिलने वाले I-वीजा पर भी लागू होगा.
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भारतीय छात्रों पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यह नियम भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनने जा रहा है. इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में 'ओपन डोर्स 2024' की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, 2023-24 के दौरान 3.31 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र अमेरिकी कॉलेजों में पढ़ रहे थे. अमेरिका में कुल इंटरनेशनल स्टूडेंट्स में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी है.
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भारतीय छात्र अक्सर पीएचडी, रिसर्च-बेस्ड मास्टर प्रोग्राम, मेडिकल ट्रेनिंग और इंजीनियरिंग रिसर्च जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स करने अमेरिका जाते हैं, जिन्हें पूरा होने में 4 साल से ज्यादा समय लगता है. अब इन सभी छात्रों को हर मोड़ पर एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा.
टाइम पूरा हो गया तो क्या होगा?
नए नियम के तहत अगर किसी छात्र की रहने की अवधि पूरी हो जाती है और उसे समय पर एक्सटेंशन नहीं मिलता, तो उसे तुरंत अमेरिका में 'अवैध' मान लिया जाएगा.
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हालांकि, यह नियम तुरंत लागू नहीं हो रहा है. इसे पहले अमेरिकी संसद की समीक्षा से गुजरना होगा, तब तक पुराना सिस्टम ही लागू रहेगा.