ट्रंप का 'ब्रह्मास्त्र', 844 फीट लंबाई, 50000 टन वजन… कितना शक्तिशाली है USS Tripoli, जो ईरान पर करेगा जमीनी हमला

US Navy Warship USS Tripoli: अमेरिका ने मध्य पूर्व अपने युद्धपोत त्रिपोली को तैनात कर दिया है, जिस पर 3500 मरीन सैनिक तैनात हैं। यह सेना ईरान में जमीनी हमले करने के लिए बुलाई गई है। अगर यह सेना ईरान में उतर गई तो ईरान पर अमेरिका का कब्जा संभव है।

US Navy Warship USS Tripoli
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USS Tripoli Features: ईरान के खिलाफ जंग जीतने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अब ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करेंगे। जी हां, ट्रंप ने अपने बाहुबली को रणक्षेत्र में उतार दिया है। मिडिल ईस्ट में अपने विशालकाय युद्धपोत USS ट्रिपोली को तैनात कर दिया है, जो जापान से मध्य पूर्व आज सुबह पहुंचा। इस युद्धपोत पर 3500 US मरीज सैनिक तैनात हैं, जिन्हें ईरान पर जमीनी हमले करने के लिए जापान से बुलाया गया है।

ईरान के पास शांति समझौता करने के लिए सिर्फ 10 दिन

अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया तो ईरान के खर्ग आइलैंड और साउथ पार्स प्लांट पर अमेरिका का कब्जा हो सकता है। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर भी अमेरिका का कंट्रोल हो सकता है। लेकिन फिर भी अमेरिका ने ईरान को एक मौका दिया है। 15 सूत्रीय पीस प्लान ईरान को दिया है और 10 दिन का समय दिया है, जिसे अगर ईरान से स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले करके कब्जे करेगा।

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समुद्र से जमीन पर हमले करने में सक्षम है USS त्रिपोली

बता दें कि अमेरिका का युद्धपोत त्रिपोली नौसेना का मॉडर्न एम्फीबियस असॉल्ट शिप है। यह जंगी जहाज समुद्र से जमीन पर हमले करने में सक्षम है। मरीज सैनिकों को जमीन पर उतारकर उन्हें कवर देने में सक्षम है। यह शिप करीब 844 फीट लंबा है और इसका वजन करीब 50000 टन है, जिसके साथ यह बाहुबली हथियार है। इस युद्धपोत को लाइटनिंग कैरियर भी कहते हैं।

इस पर करीब 2500 मरीन सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं। वहीं यह युद्धपोत F-35 लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, MV-22 ऑस्प्रे विमानों, MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टरों से लैस है। वर्ष 1805 के बार्बरी युद्ध में अमेरिका की नौसेना ने त्रिपोली पर जीत हासिल की थी। अमेरिका की जिस मरीन कॉर्प्स ने त्रिपोली को जीता था, उसी को सम्मान देने के लिए युद्धपोत का नाम त्रिपोली रखा गया था।

वेल डेक के बिना जंगी जहाज हथियारों-सैनिकों का हैंगर

बता दें कि USS त्रिपोली वॉरशिप में वेल डेक नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल हैंगर के तौर पर किया जाता है। एविएशन फ्यूल (हवाई ईंधन) और विमानों के रखरखाव के लिए इसे इस्तेमाल किया जाजात है, यानी इसके अंदर जहां हथियारों का भंडार है। वहीं इसके अंदर 3 से 5 हजार सैनिक रह सकते हैं। इधर-उधर तैनात युद्धपोतों के विमानों की मरम्मत करने के लिए इसके अंदर वर्कशॉप है। इसके अंदर विमानों का भंडार भी मिल जाएगा, जिन्हें पूरे समुद्र में कहीं भी और किसी भी समय भेजा जा सकता है।

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त्रिपोली पर नौसेना की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी तैनात

बता दें कि युद्धपोत त्रिपोली पर नौसेना की 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट तैनात है। वर्तमान में इस पर 2200 मरीन कमांडो तैनात है। इनके अलावा क्रू मेंबर्स हैं। त्रिपोली पर तैनात मरीन कमांडो ‘रैपिड-रिस्पॉन्स फोर्स’ का हिस्सा हैं, जो दुनिया के किसी भी कोने में संकट के समय सैन्य कार्रवाई करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। यह मरीन कमांडो ग्राउंड कॉम्बैट और एयर कॉम्बैट में सक्षम हैं। समुद्री रास्ते जाकर किसी भी देश पर हमला करने, फंसे लोगों को बचाने और सुरक्षित निकालने के लिए तैयार की गई है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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