मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अहम समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को साफ करने की अमेरिका ने तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से ईरान ने इस रूट को बंद कर रखा है, यहां से किसी भी जहाज को नहीं गुजरने दिया जा रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस रूट पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं. इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ने अपने दो सबसे एडवांस युद्धपोत यूएसएस फ्रैंक ई पेटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी को मैदान में उतार दिया है.

बेहद हाई-टेक होगा ऑपरेशन

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया है कि यह ऑपरेशन बेहद हाई-टेक होने वाला है. परंपरागत तरीके से जहाजों को सीधे सुरंग वाले क्षेत्रों में भेजने के बजाय, अब रोबोटिक मशीनों का सहारा लिया जा रहा है. नौसेना 'किंगफिश' (Mk 18 Mod 2) जैसे मानवरहित अंडरवाटर ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है. ये टॉरपीडो के आकार के ड्रोन समुद्र की गहराई में जाकर सोनार मैपिंग करते हैं और छिपे हुए विस्फोटकों का सटीक पता लगाते हैं.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : ईरान-US शांति वार्ता फेल होने पर भी किस बात का क्रेडिट ले रहा पाकिस्तान? विदेश मंत्री इशाक डार ने जताई सीजफायर जारी रखने की उम्मीद

---विज्ञापन---

आसमान से लेजर और पानी में धमाका

सिर्फ पानी के अंदर ही नहीं, बल्कि आसमान से भी निगरानी सख्त रहेगी. अमेरिका ने MH-60S हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है, जो 'एयरबोर्न लेजर माइन डिटेक्शन सिस्टम' से लैस हैं. यह लेजर तकनीक समुद्र की सतह पर तैर रही या पानी के ठीक नीचे छिपी सुरंगों को तुरंत स्कैन कर लेती है. जैसे ही कोई सुरंग मिलती है, उसे 'एयरबोर्न माइन न्यूट्रलाइजेशन सिस्टम' नाम के रिमोट-कंट्रोल रोबोट के जरिए वहीं धमाका करके नष्ट कर दिया जाता है.

यह भी पढ़ें : बड़ा झटका! US-ईरान शांति वार्ता फेल, वेंस बोले- शर्तें मानने को तैयार नहीं Iran, हम वापस लौट रहे अमेरिका

होर्मुज क्यों इतना अहम?

होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. ईरान की नाकाबंदी की वजह से पिछले कई हफ्तों से करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं. इसके वजह से कई देशों में एनर्जी क्राइसिस हो गया है. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है.