अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए लेवल पर पहुंच गया है. अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी (Naval Blockade) ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली ऑयल सप्लाई पर गंभीर असर डाला है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नाकेबंदी की वजह से ईरान के तेल निर्यात में भारी गिरावट आई है और लाखों बैरल कच्चा तेल समुद्र में टैंकरों पर ही फंसा हुआ है. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इस वक्त 41 टैंकरों में करीब 6.9 करोड़ बैरल तेल बीच मझदार में है. अमेरिका ने अप्रैल 2026 में ईरान के बंदरगाहों और समुद्री रास्तों को रोकना शुरू किया था, जिसका मकसद ईरान पर दबाव बनाना और उसे परमाणु प्रोग्राम पर बातचीत के लिए मजबूर करना है.
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चीन पर बड़ा असर होगा
अमेरिका इस बात पर अड़ा है कि वो ईरानी टैंकरों को होर्मुज पार करके दूसरे देशों को ऑयल सप्लाई नहीं करने देगा. ईरान ने अमेरिका से बचने के लिए अपने कुछ जहाजों का ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया है. ऐसे में ये पता नहीं चल पा रहा कि चीन को कितना तेल मिल रहा है. चीन जैसे देश, जो ईरान के तेल के बड़े खरीदार हैं, इस हालात से ज्यादा नुकसान में हो सकते हैं. चीन हर रोज ईरान से13-14 लाख बैरल तेल खरीदता है. ईरान के ऑयल सप्लाई का 80-90 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास जाता है. अमेरिका की नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. तेल ईरान की कमाई का बड़ा स्रोत है, और निर्यात रुकने से देश को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
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ईरान की अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है?
कुछ अनुमानों की मानें तो ईरान को हर दिन करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नाकेबंदी के बाद से होर्मुज स्ट्रेट से कोई भी ईरानी जहाज बाहर नहीं गया है, जिसकी वजह से तेल सप्लाई से होने वाली आमदनी नहीं हो पा रही है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ईरान के पास तेल स्टोर करने की क्षमता भी तेजी से खत्म हो रही है. बड़ी मात्रा में कच्चा तेल टैंकरों में ही जमा है, जिससे प्रोडक्शन घटाने की नौबत आ सकती है. अगर ऐसा होता है, तो लंबे समय तक ईरान के तेल उद्योग को नुकसान पहुंच सकता है
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