अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही ये बातचीत उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन दूसरे दौर की वार्ता भी असफल रही. इससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बिना किसी सीधी बातचीत के वापस लौटने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी. अमेरिकी की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर इस्लामाबाद आने वाले थे.

ये भी पढ़ें: होर्मुज में ईरान की बिछाई माइन्स कितनी खतरनाक? टकरा गया कोई जहाज तो होगा ऐसा हाल

---विज्ञापन---

क्या बोले ट्रंप?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरे को अचानक रद्द करते हुए कहा कि ईरान के भीतर ही साफ नहीं है कि बातचीत कौन करेगा. ट्रंप ने इसे समय और मेहनत दोनों की बर्बादी बताते हुए यात्रा को गैररूरी करार दे दिया. उन्होंने आगे कहा कि ईरानी नेतृत्व के भीतर अंदरूनी झगड़े और भ्रम इतना ज्यादा है कि किसी को भी पता नहीं कि कौन कंट्रोल में है. ट्रंप ने फ्लोरिडा में मीडिया से बात करते हुए ये भी कहा कि डेलिगेशन की पाकिस्तान यात्रा में बहुत ज्यादा वक्त और खर्च लगने वाला था. ट्रंप ने चुटकी लेते हुए ये भी कहा कि ईरान अगर सच में बात करना चाहता है तो बस एक फोन कॉल काफी है.

---विज्ञापन---

ईरान नहीं चाहता सीधी बातचीत

दरअसल, अप्रैल के दूसरे सप्ताह में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधे उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी. हालांकि, उस दौर में भी कोई समझौता नहीं हो पाया था और कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने रहे. अब दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पाकिस्तान पहुंचे, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वो अमेरिकी अधिकारियों से सीधे बातचीत नहीं करेंगे. ईरान का कहना है कि वो सिर्फ पाकिस्तान के जरिए ही अपनी बात अमेरिका तक पहुंचाएगा. वहीं, अमेरिका इस बार सीधे बातचीत पर जोर दे रहा था. लेकिन हालात ऐसे बने कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा भी रद्द कर दी गई.

---विज्ञापन---

पाकिस्तान फिर हुआ नाकाम

पाकिस्तान ने इस वार्ता को सफल बनाने के लिए अहम भूमिका निभाने की कोशिश की. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने दोनों देशों के बीच संवाद कराने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य विवाद आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर है. ईरान चाहता है कि सभी बैन पूरी तरह हटाए जाएं, जबकि अमेरिका सिलसिलेवार तरीके से राहत देने के पक्ष में है. इसके अलावा, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच गहरी असहमति है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: अमेरिका ने फिर दबोची ईरान की ‘गर्दन’, इस्लामाबाद में शांति वार्ता के बीच रोका समुद्री जहाज, आखिर क्या चाहते हैं ट्रंप?

---विज्ञापन---