अमेरिका और ईरान में समझौता होने के आसार नहीं हैं। ईरान अपनी जिद पर अड़ा है और अमेरिका भी हर हाल में अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। 2 मुद्दों होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम पर पेंच फंसा हुआ है। 2 दौर की शांति वार्ता फेल हो चुकी है। दोनों देश एक दूसरे को समझौते के लिए बातचीत का ऑफर भी दे चुके हैं। अब जंग के मैदान में रूस के राष्ट्रपति पुतिन की एंट्री से हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। रूस ने ईरान को कहा दिया है कि वह हरसंभव मदद करेगा।
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रूस का मामले में पूरी मदद करने का वादा
बता दें कि बीते दिन मॉस्को में सेंट पीटर्सबर्ग में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से ईरान के विदेश मंत्री अराघची की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान रूस ने ईरान का समर्थन किया और ईरान को हरसंभव मदद करने आश्वासन दिया। पुतिन से मीटिंग के बाद अराघची ने मीडिया से कि अमेरिका और इजरायल के कारण पूरी दुनिया ईरान की ताकत का अंदाजा लगा चुकी है। ईरान बेहद मजबूत और शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है। इजरायल या अमेरिका किसी के आगे घुटने नहीं टेकेगी।
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संयुक्त राष्ट्र का होर्मुज स्ट्रेट खोलने का आग्रह
बता दें कि अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता फेल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने मामले में दखल दिया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान ने कोई भेदभाव किए बिना और कोई टोल वसूले बिना होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की अपील की है। क्योंकि यह रास्ता किसी एक के लिए नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। इस रास्ते को ब्लॉक करना मतलब दुनिया के एक कोने को बाकी दुनिया से अलग करना है। ईरान और अमेरिका दोनों को दुनिया की भलाई के काम करना चाहिए।
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होर्मुज को खोलने के लिए ईरान ने रखी शर्त
बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री रूस से वापस पाकिस्तान पहुंच गए हैं। 48 घंटे में वे तीसरी बार पाकिस्तान आए हैं। उन्होंने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका के सामने शर्त रखी है कि वे होर्मुज स्ट्रेट को खोल दें। इसके बाद ईरान परमाणु समझौता करने के लिए बातचीत करेगा। उन्होंने पाकिस्तान को अपनी शर्तें सौंपी और रूस चले गए। वहीं अमेरिका ने रूस के सामने शर्त रखी है कि अब ईरान को बातचीत करनी है तो वह फोन करे। साथ ही समझौता करने के लिए 3 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है।
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