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अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, अफगान और ईरानी नागरिकों समेत दर्जनों प्रवासियों को भेजा अफ्रीका

ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति के तहत अमेरिका ने दर्जनों प्रवासियों को सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया. इनमें एक अफगान नागरिक भी शामिल है, जिसे अफगानिस्तान में तालिबान के संभावित उत्पीड़न के खतरे के चलते अमेरिकी अदालत से सुरक्षा मिली थी.

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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति के तहत प्रवासियों को देश से बाहर भेजने का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में शनिवार को दर्जनों लोगों को अमेरिका से सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेजा गया. वहीं, निर्वासित किए गए लोगों में एक 20 वर्षीय अफगान नागरिक भी शामिल है. उसके वकील अल्मा डेविड और एक मानवाधिकार संगठन ने इसकी पुष्टि की है.

वकील के मुताबिक, इस अफगान नागरिक को पहले ही अमेरिकी अदालत से अफगानिस्तान भेजे जाने के खिलाफ सुरक्षा मिल चुकी थी. कोर्ट ने यह राहत इसलिए दी थी, क्योंकि उसे तालिबान की ओर से गंभीर खतरा बताया गया था. अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कहा गया था कि उसके परिवार को तालिबान से धमकियां मिल रही थीं. इसकी वजह उसके भाइयों का अमेरिकी सेना के साथ जुड़ाव बताया गया है.

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अल्मा डेविड के अनुसार, युवक का एक भाई फिलहाल अमेरिका में रहता है और वह अफगान नेशनल आर्मी में सेवा दे चुका है. तालिबान के अगस्त 2021 में सत्ता पर कब्जा करने से पहले अफगान नेशनल आर्मी अमेरिकी सेना के साथ मिलकर काम करती थी.

वकील ने यह भी बताया कि युवक का दूसरा भाई अमेरिकी सेना से प्रशिक्षण प्राप्त पायलट था. तालिबान के सत्ता में आने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. इन परिस्थितियों को देखते हुए युवक के अफगानिस्तान लौटने पर उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई गई थी. इसके बावजूद उसे अमेरिका से निकालकर सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य भेज दिया गया.

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किन लोगों को भेजा गया?

शनिवार को अमेरिका से रवाना हुई निर्वासन उड़ान सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य की राजधानी बांगुई पहुंची. इस विमान में 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिक सवार थे. इनके अलावा नेपाल और निकारागुआ के भी कई प्रवासी इस उड़ान के जरिए वहां पहुंचे. यह जानकारी मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स फर्स्ट की नीति, शरणार्थी और अप्रवासी अधिकार निदेशक सावी अरवे ने दी। संगठन के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति के तहत ऐसे लोगों को उनके मूल देश के बजाय तीसरे देशों में भेजने की प्रक्रिया तेज हुई है.

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अधिकार संगठनों का दावा है कि अमेरिकी प्रशासन ने कई गोपनीय समझौतों के जरिए हजारों प्रवासियों को करीब दो दर्जन ऐसे देशों में भेजा है, जो उनके मूल देश नहीं हैं. इसे ट्रंप प्रशासन की व्यापक इमिग्रेशन कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है.

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First published on: Aug 30, 2026 06:54 AM

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