रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को 4 साल से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जंग का नतीजा अभी तक निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा है. एक तरफ विश्व का सबसे बड़ा देश रूस अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन भी झुकने को तैयार नहीं है. हालांकि रूस ने शनिवार को 3 दिनों के लिए युद्ध विराम का ऐलान किया, जिसके बाद एक बार फिर से दोनों देशों के बातचीत के टेबल पर आने की उम्मीद है. इस बीच ऐसी भी खबरें सामने आ रही हैं कि यूक्रेन के पास अब आधुनिक हथियार भी खत्म हो गए हैं, और उन्हें 1970 के दशक के हथियार इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं.
यूक्रेन के पास खत्म हुई मिसाइलें?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के खिलाफ यूक्रेन को अब हथियारों और खासकर इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि रूसी ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए यूक्रेनी वायुसेना को करीब पांच दशक पुरानी R-60 मिसाइल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. यह मिसाइल सोवियत दौर में 1970 के दशक में बनाई गई थी और 2022 में रूस के साथ युद्ध के बाद इसे पुराने हथियारों में गिना जाने लगा था.
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रूस के ड्रोन और मिसाइलें बनीं मुसीबत
रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन के MiG-29 लड़ाकू विमान अब R-60 के जरिए रूसी हवाई टार्गेट को निशाना बना रहे हैं. रूस की ओर से हाई स्पीड वाले ड्रोन और मिसाइलों के हमले बढ़ने के बाद यूक्रेन के लिए इनका मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है. रूस गेरन-3, गेरन-4 और गेरन-5 जैसे ड्रोन के अलावा बंडेरोल मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. इनमें से कुछ हथियार करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की स्पीड से हमला कर सकते हैं.
लड़ाकू विमानों को किया तैनात
रूस के ऐसे हाईटेक मिसाइलों को रोकना जमीन पर मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम या इंटरसेप्टर ड्रोन के बस की बात नहीं है. यही वजह है कि यूक्रेन अब लड़ाकू विमानों को भी इन अभियानों में लगा रहा है. उसके पास सोवियत दौर के MiG-29 के साथ पश्चिमी F-16 लड़ाकू विमान भी हैं. MiG-29 में R-60 के अलावा R-73 और R-27 जैसी मिसाइलें इस्तेमाल की जा सकती हैं. इनमें R-73 को तेज रूसी ड्रोन के खिलाफ प्रमुख विकल्पों में माना जाता रहा है.
R-73 की कमी ने बढ़ाई परेशानी
युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के पास R-73 मिसाइलों का अच्छा भंडार था और सहयोगी देशों से भी कुछ मिसाइलें मिलने की बात सामने आई थी. हालांकि, लंबे समय तक चले युद्ध के कारण अब R-73 मिसाइलों की संख्या सीमित होती जा रही है. रिपोर्टों के अनुसार, R-73 को कुछ जमीन आधारित एयर डिफेंस सिस्टम और यहां तक कि रोबोटिक नौकाओं पर भी इस्तेमाल किया गया है.
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