मिडिल ईस्ट में छिड़ा युद्ध अब दुनिया के दो सबसे पुराने सहयोगियों अमेरिका और ब्रिटेन के बीच दरार पैदा कर रहा है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बुधवार को राष्ट्र के नाम एक संबोधन में साफ कर दिया कि ब्रिटेन किसी भी कीमत पर ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में शामिल नहीं होगा. स्टार्मर का यह कड़ा रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस तीखी बयानबाजी के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने नाटो (NATO) सहयोगियों को युद्ध में साथ न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी.
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने साफ शब्दों में कहा, ‘मुझ पर चाहे जितना भी दबाव बनाया जाए या बाहर कितना भी शोर हो, मैं हमेशा वही फैसले लूंगा जो ब्रिटेन के हित में होंगे. इसलिए मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि यह हमारा युद्ध नहीं है और हम इसमें नहीं घसीटे जाएंगे.’
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स्टार्मर की यह टिप्पणी सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के उन हमलों का जवाब है, जिसमें उन्होंने यूरोपीय देशों को ‘स्वार्थी’ बताया था. ट्रंप ने हाल ही में इटली और स्पेन द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने से रोकने पर नाराजगी जताई थी और नाटो से बाहर निकलने तक के संकेत दे दिए थे.
मंगलवार को ही ट्रंप ने सीधे तौर पर ब्रिटेन को दो टूक लहजे में कहा था कि अगर ब्रिटेन इस युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देता, तो भविष्य में अमेरिका उसकी कोई मदद नहीं करेगा. ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा था कि ब्रिटेन को अगर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल लेना है तो वह खुद वहां जाकर उसे खुलवाएं. उन्होंने साथ ही कहा था कि अगर होर्मुज नहीं खुलवा सकते तो अमेरिका से तेल खरीद सकते हैं.
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बता दें, दुनिया का 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने इस रूट को बंद कर रखा है.
भले ही स्टार्मर ने युद्ध का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया हो, लेकिन वे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे इसके असर को लेकर गंभीर हैं. ईरान द्वारा होर्मुज को बंद किए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इस संकट से निपटने के लिए स्टार्मर ने ब्रिटेन में एक ग्लोबल समिट बुलाने का ऐलान किया है.
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इस समिट में 35 देशों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है. समिट का मुख्य उद्देश्य युद्ध में शामिल हुए बिना कूटनीतिक और सुरक्षात्मक तरीकों से तेल की सप्लाई चेन को फिर से बहाल करना है.
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