मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया है. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला, तो अमेरिका मंगलवार को ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर सकता है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ईरान को तुरंत ये रास्ता खोलना होगा, नहीं तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे. उन्होंने हमले को 'Power Plant Day' और 'Bridge Day' तक कह दिया, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका पावर प्लांट्स और पुलों जैसे अहम ढांचों को निशाना बना सकता है.
ये भी पढ़ें: जंग के बीच राहत की खबर! क्या खुलने वाला है होर्मुज स्ट्रेट? ओमान-ईरान की हुई ‘सीक्रेट’ मीटिंग; जानिए- क्या हुआ तय
---विज्ञापन---
होर्मुज क्यों हुआ बंद?
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से ग्लोबल ऑयल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. मौजूदा संकट में ईरान ने इस मार्ग को काफी हद तक बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी. इसके जवाब में ईरान ने कई हमले किए और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में अमेरिका ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले भी किए, जिसमें एक बड़े पुल को नुकसान पहुंचा. इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की है.
---विज्ञापन---
ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
ट्रंप की इस नई चेतावनी के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमला करता है, तो इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. ट्रंप का ये बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है. ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई 48 घंटे की समय सीमा दी. इसके बावजूद तेहरान ने रविवार को खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर नए हमले किए, जिसमें कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की सुविधाओं को निशाना बनाया.
ये भी पढ़ें: ईरान 48 घंटे में जिस पायलट को अपने ही इलाके में नहीं ढूंढ पाया, उस तक कैसे पहुंची US आर्मी? कहानी खौफनाक रेस्क्यू की