अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशों के साथ-साथ अब युद्ध का खतरा भी बढ़ता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने एक निष्पक्ष और उचित समझौता स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के हर एक पावर प्लांट और पुल को पूरी तरह तबाह कर देगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने गुस्से का इजहार करते हुए साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं. एक तरफ जहाँ शांति के लिए कूटनीति का रास्ता खुला रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की इस सैन्य कार्रवाई की धमकी ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है.
सीजफायर उल्लंघन का गंभीर आरोप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर यानी संघर्ष विराम के समझौते को तोड़ने का बड़ा आरोप लगाया है. ट्रंप के मुताबिक ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलीबारी की है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया है जिसमें फ्रांस और ब्रिटेन के जहाज भी शामिल थे. ट्रंप ने तंज कसते हुए लिखा कि ईरान की यह हरकत बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी और वह ‘टफ गाय’ बनने की कोशिश में अपना ही नुकसान कर रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि इस रास्ते के बंद होने से ईरान को रोजाना करीब 50 करोड़ डॉलर का घाटा हो रहा है, जबकि अमेरिका पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है.
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इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता
तनाव के चरम पर होने के बावजूद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद पुष्टि की है कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर इस महत्वपूर्ण बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि उनके प्रतिनिधि वहां पहुंचकर जल्द ही चर्चा शुरू करेंगे ताकि किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके. हालांकि इस बार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगे लेकिन ट्रंप के करीबियों का वहां पहुंचना यह बताता है कि अमेरिका इस डील को लेकर कितना गंभीर है और वह जल्द से जल्द कोई फैसला चाहता है.
ऊर्जा बाजार और अमेरिका की रणनीति
ईरान के साथ जारी इस टकराव के बीच ट्रंप ने अपनी आर्थिक मजबूती का भी प्रदर्शन किया है. उन्होंने कहा कि ईरान की हरकतों की वजह से कई तेल और ऊर्जा वाले जहाज अब अमेरिका के बंदरगाहों जैसे टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर मुड़ रहे हैं. ट्रंप का मानना है कि ईरान अपनी हरकतों से अनजाने में अमेरिका की मदद ही कर रहा है क्योंकि दुनिया का भरोसा अब अमेरिकी ऊर्जा पर बढ़ रहा है. अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक शांति का रास्ता साफ करती है या फिर ट्रंप की धमकी हकीकत में बदल जाती है और मध्य पूर्व में एक भीषण युद्ध की शुरुआत होती है.
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