दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच रूस ने पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है. पाकिस्तान में रूस के राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने साफ किया है कि उनका देश पाकिस्तान को रियायती दरों (डिस्काउंट) पर कच्चा तेल देने के लिए पूरी तरह तैयार है. हालांकि. इस ‘सस्ते तेल’ के पीछे रूस ने एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण शर्त रख दी है. रूस का कहना है कि अगर पाकिस्तान को तेल चाहिए. तो उसे खुद आगे बढ़कर औपचारिक तौर पर संपर्क करना होगा. यानी अब पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान की है कि वह इस मौके को भुनाता है या नहीं.
आर्थिक बदहाली के बीच रूस का ‘डिस्काउंट’ दांव
वर्तमान में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है. घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 20% तक बढ़ चुकी हैं. जिससे आम जनता की कमर टूट गई है. ऐसे में रूसी राजदूत का यह बयान किसी बड़ी राहत से कम नहीं है. खोरेव ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोर देकर कहा कि ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ है. रूस चाहता है कि पाकिस्तान इस मौके का फायदा उठाए. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अभी तक पाकिस्तान सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है.
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ईरान जंग और होर्मुज स्ट्रेट का गहराता संकट
मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने तेल की वैश्विक सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने की वजह से समुद्री रास्तों से होने वाला तेल परिवहन ठप पड़ गया है. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ा है. जहाँ एक तरफ अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. वहीं भारत जैसे देश रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल खरीद रहे हैं. रूस इस वैश्विक स्थिति का फायदा उठाकर अपना तेल बेचकर खूब मुनाफा कमा रहा है और अब वह पाकिस्तान को भी इस कतार में शामिल करना चाहता है.
क्या पाकिस्तान उठा पाएगा यह कूटनीतिक कदम?
पाकिस्तान के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि वह रूस के इस ऑफर को स्वीकार करने के लिए कितनी जल्दी कागजी कार्रवाई पूरी करता है. रूस ने साफ कह दिया है कि “अगर तेल चाहिए. तो पहल पाकिस्तान को ही करनी होगी.” पाकिस्तान के लिए यह फैसला कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. क्योंकि उसे पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों और घरेलू ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बिठाना है. यदि पाकिस्तान इस ऑफर को स्वीकार करता है. तो उसे न केवल सस्ता कच्चा तेल मिलेगा. बल्कि आसमान छूती महंगाई से जूझ रही उसकी जनता को भी बड़ी राहत मिल सकेगी.
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