अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म इलेक्शन 2026 में अपनी हार स्वीकार कर ली है और मान लिया है कि चुनाव में उन्हें और उनकी पार्टी रिपब्लिकन को करारी शिकस्त मिली है. उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 से जारी ईरान युद्ध और पेट्रोल-गैस महंगा होने के कारण अमेरिकियों पर आर्थिक प्रभाव पड़ा. इसलिए नाराज होकर मतदाताओं ने उनके खिलाफ मतदान किया. उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में चुनावी नतीजों पर खुलकर बात की और अपनी हार स्वीकारी. साथ ही उन्होंने डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई दी और उनके साथ मिलकर देश की भलाई के लिए काम करने की इच्छा जताई. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स भी यही चाहते होंगे. ऐसा करने में ही डेमोक्रेट्स की भलाई छिपी है.
चुनाव में हार के बाद ट्रंप ने स्पष्ट किए इरादे
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर मैं बैलेट पेपर पर होता तो हम चुनाव जीत जाते. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अच्छा काम कर रहे हें तो उन्हें पद से हटाने का सवाल ही नहीं उठता. डेमोक्रेट्स सोच रहे हैं कि कांग्रेस पर उनका राज हो गया तो वे उन्हें काम करने से रोक लेंगे. नहीं ऐसा नहीं है, बल्कि मैं उनक विधेयकों को राष्ट्रपति के वीटो के अधिकार से रोक दूंगा, जिनमें मैं और मेरी सरकार सहमति नहीं होगी. युद्ध के कारण पेट्रोल महंगा हुआ, जिससे अमेरिका के लोगों की जेब पर दबाव पड़ा. लेकिन चुनाव में हार के बावजूद ईरान को लेकर अपने फैसले से पीछे नहीं हटूंगा. उनका फिर से फैसला लेना पड़े तो ईरान को खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनूंगा. ईरान को किसी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा.
ईरान युद्ध के असर और नुकसान भी गिनाए
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान में ईरान युद्ध की सबसे अहम भूमिका रही है. लेकिन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का मौका फिर से मिला तो पीछे नहीं हटूंगा. ईरान को अगर परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, तो सैन्य कार्रवाई करनी जरूरी थी और आगे भी ऐसा ही होगा. हालांकि सैन्य टकराव का असर अमेरिका के ऊर्जा बाजार पर पड़ा. होर्मुज स्ट्रेट से समुद्र जहाजों की आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ीं. लेकिन अगर ईरान के पास परमाणु हथियार पहुंच गए तो दुनिया को इस नुकसान से कहीं ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा, इसलिए ईरान पर सैन्य कार्रवाई बेहद जरूरी थी.
सरकार के सामने अगले 2 साल कई चुनौतियां
मिडटर्म चुनाव 2026 में डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी की हार से ट्रंप सरकार के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी का कांग्रेस पर कंट्रोल हो गया है, इसलिए ट्रंप सरकार के लिए अगले 2 साल काम करना आसान नहीं होगा. क्योंकि डेमोक्रेट्स सरकार के फैसलों, प्रस्तावों और विधेयकों पर सवाल उठा सकेंगे और ट्रंप सरकार की नीतियों को चुनौती दे सकेंगे. ट्रंप सरकार के खिलाफ आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों में जांच शुरू हो सकती है. राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. कुल मिलाकर अब ट्रंप सरकार अगले 2 साल के लिए नीतिगत रूप से पंगु हो गई है, क्योंकि उनकी शक्तियों और फैसले लेने के अधिकारों पर अंकुश लग गया है.