ईरान और इजरायल संघर्ष के बीच बड़ी खबर आ रही है। ईरान के बाद अब अमेरिका क्यूबा पर हमला करने जा रहा है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप को क्यूबा पर सैन्य हमले की इजाजत दे दी है। हमला करने से रोकने वाला एक प्रस्ताव विपक्ष द्वारा लाया गया था जिसे सीनेट ने 51-47 के बहुमत से असफल कर दिया।

अधिकांश रिपब्लिकन सीनेटरों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताते हुए राष्ट्रपति के पक्ष में मतदान किया। डेमोक्रेट्स ने इसे संविधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन करार दिया, लेकिन दो डेमोक्रेट सीनेटरों ने मतदान से अनुपस्थित रहकर ट्रंप की मदद कर दी। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स क्यूबा की सरकार पर रूस और चीन के साथ सैन्य सहयोग के आरोप लगाते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में क्यूबा को 'क्षेत्रीय खतरा' घोषित किया है।

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क्या है दोनों के बीच विवाद?

बता दें कि अमेरिका-क्यूबा विवाद 67 साल पुराना है। 2026 में फिर से गरमा गया है। विवाद की जड़ 1959 की क्रांति है। फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित बातिस्ता सरकार हटाकर कम्युनिस्ट शासन बनाया। अमेरिका ने क्यूबा की चीनी मिलें और कंपनियां जब्त होने के बाद 1960 से प्रतिबंध लगा दिए। इसके बाद शीत युद्ध में क्यूबा सोवियत संघ के साथ गया। 1962 मिसाइल संकट के बाद अमेरिका ने पूरी घेराबंदी कर दी। 1982 में क्यूबा को "आतंकवाद प्रायोजक देश" घोषित किया।

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इसके अलावा जनवरी 2026 से क्यूबा को तेल नहीं मिला है। ट्रम्प ने 29 जनवरी को कार्यकारी आदेश जारी किया, जो देश क्यूबा को तेल देगा उस पर टैरिफ लगेगा। वेनेजुएला में 3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद मादुरो को पकड़ा गया, तेल सप्लाई बंद। मेक्सिको भी US दबाव में रुक गया।

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