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'संधि टूटी तो…', सिंधु जल समझौते पर एक बार फिर पाकिस्तान ने दी भारत को गीदड़ भभकी

1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जवाहरलाल नेहरू और अयूब खान के बीच हुआ यह समझौता तब तक सस्पेंड रहेगा, जब तक पाकिस्तान आतंक का रास्ता पूरी तरह नहीं छोड़ देता.

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अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है. अपनी खेती और बिजली उत्पादन के लिए पूरी तरह सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर रहने वाला पाकिस्तान अब इस मुद्दे को लेकर वैश्विक मंचों पर गुहार लगा रहा है.

इसी कड़ी में बौखलाए पाकिस्तान ने मंगलवार को एक ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया, जिसमें भारत का नाम लिए बिना उसे धमकी भरे लहजे में चेतावनी दी गई. पाकिस्तान ने कहा कि यदि 1960 की यह ऐतिहासिक संधि विफल होती है, तो कागज पर मौजूद कोई भी वैश्विक वर्ल्ड ऑर्डर सुरक्षित नहीं रहेगा.

‘नदी का पानी कोई हथियार नहीं’

इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, ‘साझा पानी को कभी भी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. इसे सहयोग, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के साथ देशों के बीच एक पुल के रूप में काम करना चाहिए.’

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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान को उसके पानी के अधिकारों से वंचित करने के किसी भी प्रयास के गंभीर परिणाम होंगे, जिससे दक्षिण एशिया के लगभग दो अरब लोगों की शांति और सुरक्षा प्रभावित होगी.

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वहीं, पाकिस्तानी सीनेटर मुसादिक मलिक ने भारत पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संधियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. मलिक ने कहा, ‘सिंधु जल संधि के दौरान दोनों परमाणु ताकतों के बीच तीन युद्ध हुए हैं. अगर यह संधि नहीं टिकी, तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद कागज पर बनी कोई भी विश्व व्यवस्था सुरक्षित नहीं रहेगी.’

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साथ ही उन्होंने कहा, ‘अगर कोई शक्तिशाली देश एक दिन उठकर यह कह दे कि यह संधि मुझ पर लागू नहीं होती और इसे एकतरफा सस्पेंड कर दे, तो ऐसी संधियों का क्या मूल्य रह जाता है?’

भारत का रुख साफ

भारत ने इस पूरे मामले पर अपना रुख बेहद सख्त और स्पष्ट रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा था कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.’

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भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर ठोस, विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक जल सहयोग को आतंकवाद से अलग नहीं रखा जा सकता. भारत ने पश्चिमी नदियों पर हाइड्रोपावर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के काम को भी तेज कर दिया है ताकि संधि के कानूनी दायरे में रहते हुए पानी का अधिकतम उपयोग भारत में ही किया जा सके.

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फिलहाल, 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में जवाहरलाल नेहरू और अयूब खान के बीच हुआ यह समझौता तब तक सस्पेंड रहेगा, जब तक पाकिस्तान आतंक का रास्ता पूरी तरह नहीं छोड़ देता.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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