तनावपूर्ण अमेरिका-ईरान संबंधों में नया मोड़ आया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की शर्तों का आदान-प्रदान पाकिस्तान के माध्यम से पूरा हो चुका है. अब बातचीत का स्थान तय करने की कवायद चल रही है, जिसमें इस्लामाबाद और तुर्की की राजधानी अंकारा प्रमुख विकल्प के रूप में विचाराधीन हैं. अमेरिका द्वारा ऐलान किए गए आंशिक युद्धविराम का पांचवां दिन 27 मार्च को पूरा होने वाला है, जिसके बाद वार्ता की समयसीमा और सख्त हो सकती है.

पाकिस्तान बना डाकिया


बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की यह भूमिका अप्रत्याशित लेकिन रणनीतिक है. क्षेत्रीय प्रभाव और दोनों पक्षों से अच्छे संबंधों के चलते इस्लामाबाद को मध्यस्थ चुना गया. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में पाकिस्तानी अधिकारियों के जरिए ईरान को अपनी शर्तें सौंपीं, जिसमें ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी, होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रखना और क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई प्रमुख हैं. जवाब में तेहरान ने अपनी मांगें रखीं, जैसे अमेरिकी सैन्य वापसी, आर्थिक प्रतिबंध हटाना और मध्य पूर्व में हस्तक्षेप बंद करना.

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क्या खत्म होगा युद्ध?


गौरतलब है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को युद्ध का ऐलान किया था. ईरान में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और उसके कई उर्जा संयंत्रों को भी इजरायल द्वारा निशाना बनाया गया है. ईराने भी इसके जवाब में पड़ोसी मुल्कों में मौजूद अमेरिकी एयरबेस और इजरायल पर सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें दांगी. अब युद्ध को एक महीना पूरा होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में अमेरिका को भी इस जंग से काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. ऐसे में अमेरिका ने भी बातचीत की टेबल पर आने का फैसला किया. वहीं, दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी कि युद्ध विराम तेहरान की शर्तों पर ही होगा.

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