नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में मीडिया से बातचीत करते हुए ईरान के राजदूत फतहाली ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए टोल देना पड़ा है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि ईरान ने भारत से अब तक कोई शुल्क नहीं वसूला है और अगर किसी को शक है तो वह भारत सरकार से इस बारे में पूछ सकता है. राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान और भारत के बीच संबंध बहुत पुराने और मजबूत हैं इसलिए इस तरह के दावों में कोई सच्चाई नहीं है. हालांकि भारत के करीब 15 जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने की कोशिशें जारी हैं.

भारत के साथ मजबूत रिश्तों पर जोर

ईरानी राजदूत ने मुश्किल समय में भारत के साथ अपनी दोस्ती और साझा हितों का जिक्र करते हुए इसे एक भरोसेमंद साझेदारी बताया है. उन्होंने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री भी भारत को अपने करीबी मित्र देशों की सूची में रखते हैं जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गर्मजोशी को दर्शाता है. भारत के लिए होर्मुज का रास्ता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग आधा कच्चा तेल और एलपीजी आयात इसी संकरे रास्ते से होकर आता है. ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और समुद्री व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण को लेकर खींचतान जारी है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: इस्लामाबाद से उड़ान भरते ही जेडी वेंस ने क्यों मिलाया था फोन? नेतन्याहू ने खुद बताया- क्या हुई बातचीत

---विज्ञापन---

अमेरिका से बातचीत के लिए दरवाजे खुले

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद भी ईरान ने बातचीत की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म नहीं किया है. राजदूत फतहाली ने संकेत दिया है कि अगर वाशिंगटन अपनी 'गैर-कानूनी मांगों' को छोड़ देता है तो ईरान बातचीत के अगले दौर के लिए तैयार है. उन्होंने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिकी पक्ष द्वारा रखी गई अस्वीकार्य शर्तों को जिम्मेदार ठहराया है. ईरान का कहना है कि अगर उनकी शर्तों को माना जाता है तो भविष्य में समझौता मुमकिन है लेकिन दबाव और अनुचित शर्तों के आगे वे किसी भी हाल में झुकने को तैयार नहीं हैं.

---विज्ञापन---

ट्रंप की धमकी और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और जहाजों को रोकने की धमकी पर भी ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. राजदूत ने कहा कि वाशिंगटन ईरान की सैन्य क्षमताओं से पूरी तरह वाकिफ है और ऐसी किसी भी कार्रवाई का अंजाम गंभीर हो सकता है. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बड़ा हिस्सा ईरान की क्षेत्रीय जल सीमा के भीतर आता है जिस पर उनका संप्रभु अधिकार है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन को लेकर डर पैदा कर दिया है जिससे आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक संघर्ष और गहराने के आसार दिख रहे हैं.

---विज्ञापन---

---विज्ञापन---