होर्मुज संकट से पैदा हुआ नया समुद्री खतरा, जहाजों के जरिए दुनिया में फैल सकती हैं कौन सी आक्रामक प्रजातियां?

बायोफाउलिंग के जरिए केवल सामान्य समुद्री जीव ही नहीं, बल्कि परजीवी और रोग फैलाने वाले जीव भी नए पर्यावरण में पहुंच सकते हैं. इससे स्थानीय मछलियों और शेलफिश पर असर पड़ने की आशंका रहती है.

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इस प्रक्रिया को बायोफाउलिंग कहा जाता है. (Photo: AI)

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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर होने वाले समुद्री यातायात में आई रुकावटों ने इंटरनेशनल शिपिंग इंडस्ट्री के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में लंबे समय तक रुके और फंसे कार्गो शिप अब एक अलग तरह के पर्यावरणीय खतरे का कारण बन सकते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन जहाजों की सतह पर जमा होने वाले समुद्री जीव दूसरी जगहों तक पहुंचकर आक्रामक प्रजातियों के फैलाव का कारण बन सकते हैं.

लंबे समय तक खड़े जहाज बन सकते हैं खतरा!

आपको बता दें कि जब कोई जहाज कई हफ्ते या महीनों तक समुद्र में एक ही जगह खड़ा रहता है, तो उसके पानी के भीतर मौजूद हिस्सों पर शैवाल, बार्नाकल, मसल्स और दूसरे सूक्ष्म समुद्री जीव चिपककर बढ़ने लगते हैं. इस प्रक्रिया को बायोफाउलिंग कहा जाता है. सामान्य परिस्थितियों में जहाज बंदरगाह या एंकर क्षेत्र में सीमित समय के लिए रुकते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह पर खड़े रहने से इन जीवों को जहाज के निचले तल पर पनपने और प्रजनन का अधिक समय मिल जाता है.

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. संकट से पहले यहां रोजाना करीब 130 कार्गो जहाजों की आवाजाही होती थी. ऐसे में अगर लंबे समय तक रुके जहाजों पर बड़ी संख्या में समुद्री जीव जमा हो गए हैं, तो स्थिति नॉर्मल होने और जहाजों की आवा-जाही दोबारा शुरू होने के बाद जहाज पर चिपके सूक्ष्म जीव एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं.

अच्छा या बुरा, कैसा होगा असर?

बायोफाउलिंग के जरिए केवल सामान्य समुद्री जीव ही नहीं, बल्कि परजीवी और रोग फैलाने वाले जीव भी नए पर्यावरण में पहुंच सकते हैं. इससे स्थानीय मछलियों और शेलफिश पर असर पड़ने की आशंका रहती है. अलग-अलग क्षेत्रों की प्रजातियों के संपर्क में आने से जेनेटिक चेंज की संभावना भी बन सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर जगह नई प्रजातियां स्थापित हो जाएंगी. इसके लिए अनुकूल पर्यावरण और पर्याप्त आवास जैसी कई परिस्थितियां जरूरी होती हैं. मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई जा रही है. पश्चिम एशिया और यूरोप के बंदरगाह भी इस जोखिम के दायरे में आ सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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