नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने और भारी आइस-रॉक एवलांच के बाद आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 392 हो गई है. इनमें से 389 लोगों की मौत अकेले नेपाल में हुई है, जबकि 3 लोग तिब्बत सीमा में मारे गए हैं. वहीं, सीमा के दोनों ओर 1,468 लोग अब भी लापता हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश और सुरक्षित निकासी के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया गया है.

भोटे कोशी नदी प्रणाली के ऊपरी हिस्से में बनी एक नई बैरियर झील के टूटने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बचाव कार्यों में बाधा आ रही है.

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290 भारतीयों की तलाश तेज

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारतीय राजदूतों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. भारत ने स्थिति पर नजर रखने और अपने नागरिकों को ट्रेस करने के लिए 24 घंटे चालू रहने वाला कंट्रोल रूम बनाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया.

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भारत अब तक अपने 84 नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुका है. इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में फंसे 63 भारतीय कामगार और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं. इसके अलावा रसुवा में फंसे 11 भारतीय पर्यटकों को भी नेपाल सेना ने एयरलिफ्ट कर सुरक्षित काठमांडू पहुंचाया है.

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बाढ़ में बह गए पुल और सड़कें

बाढ़ से मध्य नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में पूरा इंफ्रा तबाह हो गया है. मलबे के नीचे कई गांव और सरकारी इमारतें दब गई हैं. चितवन जिले से सबसे अधिक 137 शव बरामद किए गए हैं. लापता लोगों में नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के 80 से अधिक जवान और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 160 कर्मचारी शामिल हैं.

सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित होने के चलते दिल्ली परिवहन निगम ने 28 और 29 अगस्त की दिल्ली-काठमांडू बस सेवा को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है.

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संकट की इस घड़ी में भारत पूरी तरह नेपाल के साथ खड़ा है. भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए भारत अब तक 47.5 टन मानवीय और आपदा राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें टेंट, दवाइयां, कंबल, सोलर लैंप और खाद्य सामग्री शामिल हैं.

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