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NATO ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका, 32 देशों ने हॉर्मुज नाकाबंदी पर साथ देने से किया साफ इनकार

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ईरान से जंग अमेरिका के लिए दिनों दिन मुसीबत बनती जा रही है। अपने ही बयानों और फैसलों में राष्ट्रपति ट्रंप बार बार फंसते दिख रहे हैं। जंग में अमेरिका को बड़ा सैन्य नुकसान हुआ है। इसके भरपाई के बजाय अमेरिका सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहा है। ट्रंप ने हॉर्मुज नाकाबंदी के लिए 10 हजार कमांडो को तैनात किया है। इसी बीच NATO ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया है।

दरअसल, 2 हफ्तों के सीजफायर के बाद अफगानिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बैठक हुई थी। दोनों के अपनी अपनी शर्तों पर अड़े रहने के चलते बातचीत फेल हो गई। इसके बाद ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी कर दी। इस नाकाबंदी में साथ देने के लिए ट्रंप ने अन्य देशों का समर्थन मांगा था। काफी दबाव के बाद भी अन्य देशों ने ट्रंप के मिशन में शामिल होने से इनकार कर दिया है। अब नाटो ने भी ट्रंप को झटका देते हुए नाकाबंदी में शामिल होने से मना कर दिया है।

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रॉयटर्स के मुताबिक, NATO सहयोगी देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी वाले प्लान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि वे लड़ाई खत्म होने के बाद ही कोई कदम उठाएंगे। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर दावा किया था कि दूसरे देश भी जल्द ही होर्मुज नाकाबंदी में शामिल होंगे।

इसके बावजूद, ब्रिटेन और फ्रांस सहित नाटो के सदस्यों ने इसमें शामिल होने में रुचि नहीं दिखाई है, बल्कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे होकर वैश्विक तेल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

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अन्य देशों ने क्या कहा?

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने एक साक्षात्कार में कहा कि भारी दबाव के बावजूद, ब्रिटेन नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेगा और युद्ध में उलझने से बचने के अपने निर्णय पर ज़ोर दिया। इसके अलावा, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से यातायात बहाल करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय मिशन स्थापित करने हेतु ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ एक सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई है। स्टारमर ने यह भी कहा कि इस पहल का उद्देश्य तेल और गैस टैंकरों के सुरक्षित आवागमन के लिए नियम स्थापित करना है।

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