अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता भले ही बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई हो, लेकिन वहां से लौटते समय ईरानी प्रतिनिधिमंडल डरा हुआ था. पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता हुई थी. लेकिन इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला. अमेरिका से उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल आया था. बातचीत फेल होने के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए थे.

'विमान गिराने की थी साजिश'

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद-बघेर घलीबाफ के साथ इस्लामाबाद गए राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद मरंडी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. मरंडी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल को पुख्ता जानकारी मिली थी कि वापसी के दौरान उनके विमान को मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है.

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बीच रास्ते बदला विमान

सुरक्षा खतरों को देखते हुए तेहरान के इन ताकतवर नेताओं ने एक बड़ा फैसला लिया. तेहरान के लिए सीधा उड़ान भरने के बजाय, वे बीच रास्ते में ही एक दूसरे सीक्रेट विमान में सवार हो गए. इतना ही नहीं, यह विमान अचानक अपने तय रास्ते से मुड़ा और तेहरान के बजाय मशहद एयरपोर्ट पर बहुत तेजी से लैंड किया गया.

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लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. मशहद उतरने के बाद सुरक्षा इतनी कड़ी कर दी गई कि ईरानी मंत्रियों ने बाकी का सफर विमान से करने के बजाय ट्रेन, बस और निजी कारों के जरिए टुकड़ों में पूरा किया ताकि किसी को कानों-कान खबर न हो कि वे किस गाड़ी में सवार हैं.

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'अमेरिका धोखेबाज है'

मोहम्मद मरंडी ने लेबनानी मीडिया को बताया, 'हमें अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है. हम जानते थे कि वे हमारे विमान को उड़ाने की साजिश रच रहे हैं. हम बातचीत की मेज पर जरूर हैं, लेकिन अपनी सैन्य ताकत को भी बढ़ा रहे हैं.'

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क्या फिर होगी बातचीत?

इस जानलेवा डर के बावजूद, खबर है कि इसी हफ्ते के अंत में दोनों देश एक बार फिर इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठ सकते हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दूसरे दौर की बातचीत के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने भी मंगलवार को संकेत दिए थे कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की बातचीत जल्द हो सकती है. उन्होंने यह तो बताया कि बातचीत इस्लामाबाद में होगी, लेकिन कब होगी इसकी जानकारी नहीं दी.