ईरान-अमेरिका और इजरायल में जारी युद्ध को एक महीना बीत चुका है और जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, हालात और भी बदतर होते जा रहे हैं. इसी बीच ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना ने ईरान की जमीन पर कदम रखा, तो उनके सैनिकों को राख में बदल दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और हजारों सैनिकों की तैनाती की खबरें सामने आ रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिससे पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है. खबरें हैं कि अमेरिका ईरान के खर्ग आईलैंड पर कब्जा करने की प्लानिंग कर रहा है.
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ईरान ने क्या कहा?
ईरान ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी हमले का जवाब बेहद आक्रामक तरीके से देगा. ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिकी सेना ने जमीनी हमला किया, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. गालिबफ ने कहा कि ईरानी सेना अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही है ताकि उन्हें कड़ा सबक सिखाया जा सके. उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से हमले जारी हैं, ईरानी मिसाइलें तैयार हैं. गालिबफ ने कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करने वाला. ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने ये जानकारी दी है कि पेंटागन ईरान में हफ्तों तक चलने वाले सीमित जमीनी अभियानों की तैयारी कर रहा है. जिसके तहत खर्ग द्वीप और होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद तटीय ठिकानों पर छापे भी मारे जा सकते हैं. आपको बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने USS त्रिपोली को भी अरब सागर में तैनात किया है जो करीब 3500 मरीन से लैस युद्धपोत है.
क्या छिड़ने वाला है तीसरा विश्व युद्ध?
चिंगारी को आग बनाने के लिए ईरान के एक प्रमुख अखबार ने अमेरिका को ‘Welcome to Hell’ यानी ‘नरक में स्वागत है’ जैसी चेतावनी दी. यह संदेश अमेरिका की सैन्य तैनाती के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है. पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष का दायरा बढ़ता जा रहा है. ईरान समर्थित समूहों ने कई क्षेत्रों में हमले किए हैं, वहीं अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है. इस टकराव का असर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है. इस पूरे संकट के बीच कई देश कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं. पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है.
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