अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टारपीडो से हमला करके डुबो दिया था. इसके कुछ घंटे बाद ही ईरान ने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी टैंकर को उड़ा दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, गुरुवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यह दावा किया है.
ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि अमेरिकी जहाज में आग लग गई है. यह हमला तब हुआ जब ईरानी विदेश मंत्री ने चेताया था कि 'IRIS डेना' पर हमला करना का अमेरिका कड़वा पछतावा होगा. इनके अलावा IRGC ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना उसके कंट्रोल में होगा.
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अमेरिका ने कैसे डुबोया ईरानी जहाज
ईरानी युद्धपोत 'IRIS डेना' भारत के विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर वापस लौट रहा था. अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए इस हमले ने युद्ध क्षेत्र को सीधा हिंद महासागर और भारत के समुद्री पड़ोसी क्षेत्र तक फैला दिया है. अचानक युद्धपोत पर टारपीडो से हमला हुआ, जिसमें ईरान के 87 सैनिकों की मौत हो गई. 'IRIS डेना' का कमांडर और कुछ सीनियर अधिकारियों समेत 32 सैनिकों को बचा लिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 60 सैनिक अभी भी लापता हैं.
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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहला ऐसा हमला
पेंटागन की ओर से जारी एक वीडियो में युद्धपोत के टारपीडो की चपेट में आने के बाद एक बड़ा विस्फोट दिखाया गया, जिससे जहाज का पिछला हिस्सा उड़ गया. इसके तुरंत बाद वह डूब गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने संभवतः 'मार्क-48' भारी टॉरपीडो का इस्तेमाल किया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल कर किसी जहाज को डुबोया है.
बता दें, पिछले कुछ दिनों में, अमेरिका ने ईरानी नौसैनिक बलों पर हमले तेज कर दिए हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और एनर्जी इंफ्रा पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ जवाब दिया है, जिससे कई मौतें हुई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जंग में ईरान के 1000 से ज्यादा लोग मारे गए.