ईरान में इस समय सत्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शासन की कमान अपने हाथ में ले ली है और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका काफी हद तक सीमित हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में चल रहे इंटरनल सत्ता संघर्ष और युद्ध जैसे हालातों के बीच IRGC ने कई अहम सरकारी फैसलों पर कंट्रोल कर लिया है. यहां तक कि राष्ट्रपति ने जो नियुक्तियां की उन फैसलों को भी रोका जा रहा है.

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खामेनेई की गैर मौजूदगी से खालीपन

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये हालात इसलिए भी बने क्योंकि देश के सर्वोच्च नेता के रूप में नामित मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक तौर से सामने नहीं आ रहे हैं. उनकी हालत और लोकेशन को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. दरअसल, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद नेतृत्व में बड़ा खालीपन पैदा हो गया. इसके बाद मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया, लेकिन उनकी गैर मौजूदगी ने सत्ता संतुलन को और जटिल बना दिया है.

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नाममात्र के रह गए हैं राष्ट्रपति

इस राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाते हुए IRGC ने देश की सुरक्षा, प्रशासन और नीति से जुड़े अहम क्षेत्रों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मामलों में सेना सीधे तौर पर सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर रही है. इतना ही नहीं, राष्ट्रपति पेजेशकियन को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि उनकी शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई हैं और वे अब केवल नाममात्र के नेता बनकर रह गए हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ये स्थिति ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है, जहां चुनी हुई सरकार के बजाय सैन्य ताकत का प्रभाव बढ़ता जा रहा है.

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