मिडिल ईस्ट में एक महीने से ज्यादा युद्ध चला। फिर ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों का सीजफायर हो गया। सीजफायर होने की सबसे बड़ी वजह बड़े जलमार्गों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की थी। लेकिन अब अमेरिका इस पर बड़ा दावा कर रहा है। दावा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट में बारूद बिछाने के बाद ईरान अब लोकेशन भूल गया है। अगर ये सच हुआ तो ईरान चाहकर भी हॉर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोल पाएगा।

बता दें कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था। हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई समेत कई दिग्गज नेताओं और बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत गई। इसके बाद से युद्ध ने तेज रूप ले लिया। कुछ ही दिन में ईरान ने कार्रवाई करते हुए दुनिया के बड़े जलमार्गों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। इसके बंद होने से बाकी देशों में एलपीजी और कच्चा तेल की आपूर्ति प्रभावित होने लगी। हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कई देश युद्ध बंद करने की अपील करने लगे। युद्ध को बढ़ता देख ईरान ने छोटे-छोटे नावों के जरिए हॉर्मुज स्ट्रेट में माइंस बिछाई थीं।

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हालांकि सीजफायर के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट को कुछ जहाजों के लिए खोल दिया गया। जलमार्ग का ज्यादातर हिस्सा अभी भी बंद है। अमेरिका दावा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट न खोलने के पीछे ईरान की मर्जी नहीं बल्कि तकनीकी समस्या है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दावा किया जा रहा है कि ईरान को यह भी नहीं पता कि सभी माइंस कहां-कहां बिछाई गई थीं। हैरानी की बात है कि उन माइंस को हटाने की तकनीकी क्षमता भी सीमित है।

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हॉर्मुज में माइंस को बेतरतीब तरीके से बिछाया गया है। संभव है कि उनकी लोकेशन ठीक से रिकॉर्ड भी नहीं की गई हो। दावा है कि कुछ माइंस बहकर अपनी जगह से हट भी गई होंगी। इससे उन्हें ढूंढना और हटाना और मुश्किल हो गया है।

ईरान ने भी किया स्वीकार

अमेरिका के दावा और पुष्ट होता है जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची कहते हैं कि जलडमरूमध्य को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा। अब्बास का यह बयान माइंस से जुड़ी समस्या की पुष्टि करता है।

अभी खुला है सीमित रास्ता

हॉर्मुज स्ट्रेट बेहद संकरा रास्ता है। माइंस बिछे होने की वजह से अभी काफी कम हिस्सा खुला है। सीजफायर की शर्त में अमेरिका ने ईरान से जल्द पूरा और सुरक्षित हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात रखी है।

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